*‘न्यायपालिका के लिए काला दिन‘: SIR फ़ैसले पर योगेंद्र यादव, व प्रशांत भूषण!*
सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को वैध ठहराये जाने वाले फ़ैसले की प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, जवाहर सरकार और कल्याण बनर्जी जैसे प्रमुख लोगों ने आलोचना की है. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर बड़ा हमला बताया है.
इनका कहना है कि इस फ़ैसले से लाखों-करोड़ों वोटरों के नाम बिना पारदर्शिता के हटाए जाने को मंजूरी मिल गई है.
प्रशांत भूषण ने इसे ‘न्यायपालिका के लिए काला दिन’ बताया है. जवाहर सरकार ने कहा, ‘अब सिर्फ भगवान ही भारतीय लोकतंत्र को बचा सकते हैं.’ योगेंद्र यादव ने कहा कि संविधान को बचाने वाला आखिरी स्तंभ भी आज टूटकर गिर गया है!
SIR प्रक्रिया के दौरान देशभर में 10 % से ज्यादा वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए.
विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से अपारदर्शी थी और इसमें बड़े पैमाने पर वोटरों को वोट देने का अधिकार छीना गया. यह फैसला बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों के चुनावों के कई महीने बाद आया है.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस फ़ैसले को ‘न्यायपालिका के लिए काला दिन’ बताया. उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को जस्टिफाई कर दिया!
कई राज्यों के चुनाव SIR के आधार पर हो चुके थे। एक पूरी तरह से पक्षपाती चुनाव आयोग ने 10 प्रतिशत से ज्यादा वोटरों के नाम बिना किसी पारदर्शिता के हटा दिए। सुप्रीम कोर्ट ने SIR मामले में चुनाव आयोग की लगभग हर दलील को सही ठहराया है, और चुनाव आयोग को SIR को अपनी मर्ज़ी से कराने के लिए एक तरह से ‘ब्लैंक चेक’ दे दिया है।”
भूषण ने इस फैसले की तुलना इमरजेंसी काल के “ADM जबलपुर मामले” से की. उन्होंने कहा कि
“मुझे लगता है कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकेत है, क्योंकि चुनाव आयोग पूरी तरह से पक्षपाती हो गया है!
यह न्यायपालिका के लिए और विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के लिए एक काला दिन है. मुझे लगता है कि यह फ़ैसला उतना ही बुरा है जितना कि ADM जबलपुर फ़ैसला था, जिसमें कहा गया था कि आपातकाल के दौरान ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.”
याचिकाकर्ता और राजनीतिक नेता योगेंद्र यादव फ़ैसला सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी नहीं गए.
उन्होंने कहा कि केस तो बहुत पहले ही तय हो चुका था.
योगेंद्र यादव ने कहा, ‘असली ख़बर यह नहीं है कि कोर्ट ने SIR को संवैधानिक बता दिया; असली खबर यह है कि अब इस देश में भाजपा तय करेगी कि कौन वोट कर सकता है और कौन नहीं! संविधान को बचाने वाला आखिरी स्तंभ भी आज टूटकर गिर गया है.’
योगेंद्र यादव ने बताया कि कोर्ट ने SIR की संवैधानिक वैधता जाँचने की बजाय सिर्फ शिकायत निवारण पर ध्यान दिया.
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बिहार चुनाव होने देने की अनुमति दे दी थी, जबकि याचिका लंबित थी! योगेंद्र यादव ने चेतावनी दी, ‘कम से कम 5.9 करोड़ वोटरों को वोट का अधिकार छीना जा चुका है, जो आगे बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंच सकता है.’
भगवान ही लोकतंत्र को अब बचा सकते हैं: जवाहर सरकार
पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को SIR पर ब्लैंक चेक दे दिया!
सैकड़ों मौतों और लाखों डिलीशन्स के बावजूद कोर्ट चुनाव आयोग के साथ खड़ा रहा!
न्यायिक अधिकारियों को शामिल करना और मतदाता सूची का सबसे बुरा पोग्रोम- यह सब कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.’
उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम बंगाल और बिहार में डिलीशन्स को हथियार बनाया जा रहा है. सरकार ने कहा, ‘अब सिर्फ भगवान ही भारतीय लोकतंत्र को बचा सकते हैं। हमारे संवैधानिक संस्थानों पर गहरा साया पड़ गया है.’
यह फ़ैसला चुनावी सुधार और मतदाता सूची साफ़ करने के बीच संतुलन पर गहरी बहस छेड़ गया है!
SIR समर्थक इसे साफ़-सुथरी मतदाता सूची बनाने की दिशा में सही कदम मानते हैं, जबकि आलोचक इसे बड़े पैमाने पर वोटरों को वोट अधिकार से वंचित करने की मंजूरी बता रहे हैं.
आने वाले चुनावों और भविष्य की याचिकाओं में इस फ़ैसले के असर साफ़ दिखने की संभावना है.