शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: अनुदानित संस्कृत विद्यालयों की होगी विशेष जांच
पटना/सीतामढ़ी। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी गैर-सरकारी प्रस्वीकृत एवं अनुदानित संस्कृत विद्यालयों के स्थानीय निरीक्षण का आदेश जारी किया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल द्वारा सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
जारी पत्र के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित अनुदानित संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मियों को राज्य सरकार द्वारा वेतन अनुदान दिया जाता है। साथ ही इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से इन विद्यालयों की वास्तविक स्थिति एवं शैक्षणिक व्यवस्था की जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
निरीक्षण के लिए प्रत्येक प्रखंड में त्रिस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। समिति में संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अथवा अंचलाधिकारी अध्यक्ष होंगे, जबकि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। इसके अतिरिक्त प्रखंड मुख्यालय स्थित किसी राजकीय अथवा राजकीयकृत माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरीयतम प्रधानाध्यापक को सदस्य बनाया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि संबंधित जिला पदाधिकारी समिति के सदस्यों को नामित करेंगे। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा प्रखंड मुख्यालय स्थित विद्यालयों के वरीय प्रधानाध्यापकों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।
पत्र में कहा गया है कि सभी अनुदानित संस्कृत विद्यालयों की जांच विभागीय संकल्प संख्या-793, दिनांक 18 जून 1994 में निर्धारित शर्तों के आलोक में की जाएगी। जांच के दौरान विद्यालय भवन, शैक्षणिक गतिविधियां, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता सहित अन्य बिंदुओं का सत्यापन किया जाएगा। समिति को विद्यालयों का फोटोयुक्त प्रतिवेदन स्पष्ट टिप्पणी के साथ तैयार कर दस दिनों के भीतर जिला प्रशासन के माध्यम से शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद राज्यभर के अनुदानित संस्कृत विद्यालयों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। विभाग का मानना है कि निरीक्षण से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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