बांग्लादेश में करीब दो साल से जेल में बंद चिन्मय प्रभु को उनकी मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महज पांच घंटे की पैरोल मिली। अंतिम दर्शन के दौरान चिन्मय प्रभु की आंखों से छलके आंसुओं का जिक्र करते हुए बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को अपने परिवार के अतीत से जुड़ी विस्थापन की पीड़ा भी साझा की।
शुभेंदु अधिकारी ने चिन्मय प्रभु की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से जेल में बंद व्यक्ति को अपनी मां के अंतिम दर्शन के लिए केवल पांच घंटे की पैरोल मिलना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने अंतिम दर्शन के दौरान चिन्मय प्रभु की भावुक तस्वीर और उनकी आंखों से निकले आंसुओं का जिक्र किया।
इस घटना के संदर्भ में शुभेंदु अधिकारी ने अपने परिवार के विस्थापन के दर्द को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने भी अतीत में विस्थापन की पीड़ा झेली है। इस तरह चिन्मय प्रभु की मां के निधन और अंतिम दर्शन से जुड़ी घटना ने उन्हें अपने परिवार के पुराने अनुभवों की याद दिला दी।
