बिहार के मधुबनी जिले के मधवापुर प्रखंड निवासी सोनू कुमार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) का लाभ उठाकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उन्होंने चूड़ा मिल की स्थापना कर न केवल अपने लिए रोजगार का स्थायी माध्यम तैयार किया, बल्कि स्थानीय स्तर पर कई लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।

मधवापुर प्रखंड के सहारघाट निवासी सोनू कुमार ने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की है। रोजगार के सीमित अवसरों के बीच उन्होंने बाजार की मांग और स्थानीय जरूरतों को समझते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कदम रखने का निर्णय लिया। उन्होंने देखा कि चूड़ा और उससे बने उत्पाद, जैसे पोहा, लोगों के दैनिक भोजन और नाश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं तथा बाजार में इनकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है।

इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने 23 जनवरी 2025 को “श्रीराम चूड़ा मिल” की स्थापना की और स्थानीय स्तर पर चूड़ा एवं पोहा उत्पादन का कार्य शुरू किया।

सोनू कुमार को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत 8.80 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग ने उनके उद्यम की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें आधुनिक उपकरणों एवं संसाधनों के साथ उत्पादन शुरू करने का अवसर मिला।

हालांकि व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में उन्हें अपने उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाने और ग्राहकों तक पहुंच बनाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन गुणवत्ता, निरंतर प्रयास और ग्राहकों के विश्वास के बल पर उनके उत्पादों ने धीरे-धीरे स्थानीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली।

सोनू कुमार ने बताया कि धान की उपलब्धता के आधार पर उनकी इकाई में लगभग छह महीने तक ही उत्पादन सुचारु रूप से हो पाता है। कच्चे माल की सीमित उपलब्धता के कारण पूरे वर्ष उत्पादन जारी रखना संभव नहीं हो पाता, लेकिन इसके बावजूद वे स्थानीय उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण चूड़ा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

वर्तमान समय में उनकी इकाई में उनके अलावा पांच अन्य कुशल कारीगरों को रोजगार मिला हुआ है। इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए सोनू कुमार ने कहा कि वे अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उद्योग का विस्तार करने की दिशा में कार्य करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त निवेश और पूंजी की आवश्यकता होगी।

युवाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बाजार और कुशल श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। यदि युवा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उद्योग स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ें, तो वे न केवल अपनी बेरोजगारी दूर कर सकते हैं बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

सोनू कुमार की यह सफलता की कहानी स्वरोजगार, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो नौकरी की तलाश के बजाय स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का सपना देखते हैं।

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