बंगाल विधानसभा चुनाव विश्लेषण:-
बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच वोट प्रतिशत में 5 फीसदी का फर्क है.लेकिन सीटों में 125 का फर्क है।निश्चित तौर पर यह बात चौंकाती है कि क्या 5 प्रतिशत के स्विंग से 125 सीटों का फर्क हो सकता है?
यह बहुत चौंकाने वाला तथ्य है ऐसा हरियाणा विधानसभा चुनावों में देखा गया था
अब अगर इस अंतर को दोनों पार्टियों को मिले कुल वोट के संदर्भ में देखा जाये तो अंतर आता है 32 लाख का। दूसरे शब्दों में 32 लाख वोट के अंतर ने 125 सीटों का फर्क पैदा किया।
आपको याद हो कि बंगाल चुनाव में SIR में 27 लाख वोट काटे गये और 5 लाख नये वोटर जोड़े गये। इस आंकड़े को हम कुछ देर के लिये अलग रख देते हैं।
असली खेल किया है अन्य ने. चुनाव आयोग के मुताबिक बंगाल चुनाव में अन्य को 27 लाख से ऊपर वोट मिले हैं. ये अन्य कौन हैं?
सवाल है कि अगर इतना ध्रुवीकरण था तो 27 लाख वोट अन्य को कैसे मिल गये? बीजेपी और टीएमसी के बीच 32 लाख वोट का फर्क है। चूंकि बीजेपी की सीट कम नहीं हुई तो यह माना का सकता है कि 27 लाख वोट जो अन्य को मिले हैं उनमें से ज्यादातर टीएमसी के ही थे।।
यह ध्रुवीकरण की थ्योरी गलत है या तो 27 लाख अन्य को मिलने वाला वोट संदेह पैदा करता है है। बंगाल का चुनाव बहुत करीने से जीता गया है
ग्राउंड लेवल पर ममता बनर्जी के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में कोई बड़ा माहौल कहीं नजर नहीं आया,
206 सीट जैसा बहुमत बिना जमीनी माहौल के संदेह पैदा करता है।
देश में चुनाव की ईमानदारी निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवालिया प्रश्नचिन्ह विपक्ष द्वारा लगाया जा रहा है?
जिसे नकारा नहीं जा सकता है
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