सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में सरकारी टेंडर प्रक्रिया, ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था तथा प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों में उच्च स्तर पर प्रभावशाली नेटवर्क के माध्यम से लाभ पहुंचाने जैसी बातें भी कही जा रही हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है ताकि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई हो तो उसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का भी इंतजार है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में केवल प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
