मधुबनी जिले के राइमा गांव में किसानों को मखाना उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, मूल्य संवर्धन और उद्यमिता के माध्यम से आय बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) के अंतर्गत क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र (RRS), झंझारपुर की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, आधुनिक उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उद्यमिता विकास से जुड़ी नवीन जानकारी उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने खेत और जलाशय की वैज्ञानिक तैयारी, समय पर पौध रोपण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन करने से उत्पादन लागत कम होती है और उपज के साथ गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
इस अवसर पर डॉ. संजय कुमार, डॉ. एस.के. गंगवार, डॉ. सुनील कुमार मंडल, डॉ. राहुल राजपूत और डॉ. आशीष राय ने मखाना फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, उनके प्रभाव और समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) की वैज्ञानिक तकनीकों पर किसानों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने नियमित फसल निरीक्षण, समय पर उपचार और अनुशंसित कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि केवल मखाना उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए इसे एक सफल व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है। साथ ही मखाना की खेती के साथ मछली पालन अपनाकर एक ही जलाशय से दोहरी आय अर्जित करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मखाना उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याएं और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के सामने रखीं, जिनका वैज्ञानिकों ने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राइमा गांव के प्रगतिशील किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य लोगों की भी सक्रिय भागीदारी रही।
समापन सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मखाना आधारित उद्यमिता और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने, मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
