नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु संरक्षण के लिए काम करने वाले सोनम वांगचुक का अनशन आखिरकार समाप्त हो गया। इस फैसले के पीछे केंद्र सरकार की सक्रिय पहल, वरिष्ठ नेताओं की बातचीत और परिवार के जरिए बनाए गए संवाद की अहम भूमिका रही। कई दिनों तक चले घटनाक्रम के बाद सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत का रास्ता खुला, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।
सूत्रों के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अहम भूमिका रही। बताया जा रहा है कि उन्होंने मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान यह तय किया गया कि टकराव की स्थिति से बचते हुए संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए।
जानकारी के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने एक पत्र भेजकर सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की और बातचीत के लिए भरोसा दिलाया। इस पत्र को दोनों पक्षों के बीच विश्वास कायम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि केवल राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी लगातार प्रयास किए गए। इसी क्रम में सोनम वांगचुक के परिवार से भी संपर्क साधा गया। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी से फोन पर बातचीत कर उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई और समाधान निकालने की कोशिशों से अवगत कराया गया। परिवार के जरिए भी वांगचुक तक संवाद का संदेश पहुंचाया गया।
इन तमाम प्रयासों के बाद सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत का माहौल बना। इसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि आने वाले समय में लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार और प्रतिनिधियों के बीच आगे भी चर्चा जारी रह सकती है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी मांगें उठाते रहे हैं। उनके अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही थी और कई सामाजिक संगठनों के साथ विभिन्न वर्गों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में सरकार ने संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की रणनीति अपनाई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकार ने बातचीत को प्राथमिकता दी। अमित शाह की समीक्षा बैठक, जेपी नड्डा के पत्र और परिवार के स्तर पर हुए संपर्क ने मिलकर ऐसा माहौल तैयार किया, जिससे गतिरोध समाप्त हुआ और अनशन खत्म होने का रास्ता साफ हुआ।
हालांकि, अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बातचीत के अगले दौर में लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर क्या सहमति बनती है और सरकार इन मांगों पर किस तरह आगे बढ़ती है।
