देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी के पीछे मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के उद्देश्य से सस्ती दरों पर खरीदी गई कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित कर 165 आवासीय प्लॉट बेचे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उक्त भूमि को अपने अधीन लेने की संभावित मंशा की चर्चा से प्लॉट खरीदारों में चिंता का माहौल है।
जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
भूखंड स्वामियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने आग्रह किया है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पूर्व सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।
जीवनभर की जमा-पूंजी से खरीदे प्लॉट
खरीदारों के अनुसार, धौलास क्षेत्र की संबंधित भूमि पर अधिकांश निवेशक उत्तराखंड के निवासी हैं। कई लोगों ने जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर छोटे-छोटे भूखंड खरीदे हैं। इनमें कई पूर्व सैनिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद किया क्रय
भूखंड धारकों का कहना है कि भूमि खरीदने से पहले स्थानीय राजस्व अधिकारियों से सभी आवश्यक अभिलेखों की जांच कराई गई थी। अधिकारियों ने उस समय स्पष्ट किया था कि भूमि कृषि श्रेणी में दर्ज है और स्वामित्व को लेकर कोई विवाद लंबित नहीं है।
165 भूखंडों की बिक्री
बताया गया है कि उक्त भूमि पर कुल 165 भूखंड बेचे गए हैं। अब यदि सरकार द्वारा भूमि को राज्य में निहित करने या अन्य कार्रवाई का निर्णय लिया जाता है, तो इससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
निष्पक्ष सुनवाई की मांग
भूखंड स्वामियों ने प्रशासन से अपील की है कि प्रस्तावित किसी भी जांच या कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और संबंधित खरीदारों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की समीक्षा की बात कही जा रही है। आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।
