नई दिल्ली/सीमांचल। सीमांचल और कोसी क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और नेपाल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र मां कामाख्या मंदिर को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। मंदिर को प्रस्तावित ‘मां कामाख्या कॉरिडोर’ योजना में शामिल करने की कवायद को गति मिली है।

अमित शाह से की गई शिष्टाचार भेंट

बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मंत्री सिंह ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

कॉरिडोर योजना पर मिला सकारात्मक आश्वासन

मंत्री लेशी सिंह ने सीमांचल क्षेत्र स्थित मां कामाख्या मंदिर की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्वता को रेखांकित करते हुए इसे कॉरिडोर योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि यह मंदिर सीमांचल, कोसी, पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी देश नेपाल के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आवश्यक स्तर पर विचार कराने का आश्वासन दिया है। इससे मंदिर के विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल

यदि मां कामाख्या कॉरिडोर योजना को अंतिम स्वीकृति मिलती है, तो इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। स्थानीय व्यवसाय, परिवहन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है।

राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में योजना के विस्तृत प्रारूप और क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

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