बिहार में वित्त रहित शिक्षा नीति के विरोध में चल रहे राज्यव्यापी आंदोलन के तहत गुरुवार को सीतामढ़ी के गांधी मैदान में बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। आंदोलन के 24वें दिन बड़ी संख्या में वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
धरना समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, वित्त रहित विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों का समायोजन करने के साथ-साथ शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई।
धरना को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष एवं रामलखन सिंह यादव कॉलेज, जहानाबाद के प्रभारी प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों ने पिछले चार दशकों से सीमित संसाधनों में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को संभाला है, लेकिन आज तक उन्हें सम्मानजनक सेवा शर्तें नहीं मिल सकी हैं। उन्होंने सरकार से वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त कर सभी शिक्षण संस्थानों का समायोजन करने और शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश प्रभारी मोहम्मद अफरोज ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बिहार के हजारों वित्त रहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और सरकार को अब वर्षों पुरानी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश सेवा दल के राष्ट्रीय प्रशिक्षक डॉ. राजीव कुमार काजू ने की, जबकि संचालन प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि मो. शम्स शाहनवाज ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन से घबराकर प्रशासन ने डुमरा स्थित अंबेडकर स्थल पर धरने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद गांधी मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
धरने को संबोधित करते हुए महिला अध्यक्ष रुचि सिंह, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रकटू प्रसाद, मो. अफाक खान, सीताराम झा, प्रो. रंजीत गुप्ता, आलोक सिंह राठौर, आफताब अंजुम बिहारी, ताराकांत झा, विजय सिंह राठौर और डॉ. रोहन कुमार गुप्ता सहित कई वक्ताओं ने कहा कि वित्त रहित शिक्षण संस्थानों ने वर्षों तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद इन संस्थानों और यहां कार्यरत शिक्षकों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने सरकार से समायोजन और नियमित वेतनमान पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि जब तक वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त नहीं की जाती और शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में राज्यव्यापी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण का समापन आगामी 24 अगस्त को पटना में प्रस्तावित ‘कफन यात्रा’ के साथ किया जाएगा।
अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजीव कुमार काजू ने आरोप लगाया कि सरकार वित्त रहित कॉलेजों की उपेक्षा कर रही है तथा यूजीसी के मानकों की अनदेखी करते हुए नए कॉलेज खोल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों की नियुक्ति में आयु सीमा घटाकर योग्य अभ्यर्थियों और छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय किया गया है।
धरना कार्यक्रम में विवेक कुमार झा, राजू कुमार, ऋतु ठाकुर, वीरेंद्र सिंह कुशवाहा, अमजद खान, पंकज कुमार, राम प्रवेश राय, गुप्तेश्वर चौबे, मुकेश कुमार, केशव भारद्वाज, चुन्नू झा और अहमद रजा खान सहित बड़ी संख्या में वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, कांग्रेस सेवा दल के पदाधिकारी, कांग्रेस कार्यकर्ता और शिक्षा प्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुई, जबकि समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन से किया गया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के पदाधिकारियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
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