[24-09-2026 06:58 PM] Kulranjan Jha Prathvi News: *24 सितंबर 1932 – पूना पैक्ट दिवस : बहुजन समाज के लिए क्यों जानना जरूरी है?*
24 सितंबर सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र में दलित-बहुजन के राजनीतिक अधिकारों के समझौते और उस समझौते की कीमत का दिन है। इसे ही इतिहास में *पूना पैक्ट दिवस* कहा जाता है।
पूना पैक्ट क्यों हुआ? जड़ गोलमेज सम्मेलन में है
*1. पहला गोलमेज सम्मेलन (12 नवंबर 1930 – 19 जनवरी 1931, लंदन)*
डॉ. बाबा साहब आंबेडकर पहली बार ब्रिटिश सरकार के सामने गए और कहा – “Depressed Classes को हिंदू मत समझो, हम एक अलग और स्वतंत्र अल्पसंख्यक हैं। हमें अलग राजनीतिक अधिकार चाहिए।” यहीं से Separate Electorate यानी पृथक निर्वाचन मंडल की मांग रखी गई।
*2. दूसरा गोलमेज सम्मेलन (7 सितंबर 1931 – 1 दिसंबर 1931, लंदन)*
यह सबसे निर्णायक था। गांधी जी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि बनकर गए थे। डॉ. आंबेडकर ने स्पष्ट कहा कि अछूतों के लिए अलग निर्वाचन मंडल होना ही चाहिए, नहीं तो सवर्ण हिंदू ही दलितों का नेता चुन लेंगे। गांधी जी ने वहीं विरोध किया – “मैं अछूतों के अलग होने को जीवन भर नहीं मानूंगा।”
*3. 17 अगस्त 1932 – कम्युनल अवार्ड*
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने आंबेडकर की बात मान ली और घोषणा की – दलितों को Separate Electorate मिलेगा। मतलब दलित वोटर ही दलित नेता चुनेगा। इसमें प्रांतीय विधानसभाओं में 71 सीटें दी गईं।
*4. 20 सितंबर 1932 – गांधी का आमरण अनशन*
गांधी जी उस समय यरवडा जेल, पुणे में थे। उन्होंने कहा ये हिंदू धर्म को तोड़ेगा और 20 सितंबर को आमरण अनशन शुरू कर दिया। पंडित मदन मोहन मालवीय, तेज बहादुर सप्रू, राजाजी सब पुणे पहुंचे। बाबा साहब पर दबाव बनाया गया – “गांधी मर गए तो तुम्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”
*5. 24 सितंबर 1932 – पूना पैक्ट*
आखिर 24 सितंबर शाम 5 बजे यरवडा जेल में समझौता हुआ। हस्ताक्षर करने वालों में डॉ. आंबेडकर, पं. मदन मोहन मालवीय, सी. राजगोपालाचारी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। 26 सितंबर को गांधी ने अनशन तोड़ा।
BAWS में पूना पैक्ट कहाँ मिलेगा? प्रमाणिक संदर्भ

बहुत से लोग सोचते हैं कि पूना पैक्ट पर बाबा साहब ने एक ही जगह लिखा है। सच्चाई यह है कि *महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रकाशित “डॉ. बाबा साहब आंबेडकर: राइटिंग्स एंड स्पीचेज (BAWS)”* के कई खंडों में इसका विश्लेषण है।
*BAWS खंड 9 – सबसे महत्वपूर्ण आलोचना:* इसमें उनकी प्रसिद्ध किताब _”What Congress and Gandhi Have Done to the Untouchables”_ है। इसमें उन्होंने सबसे विस्तार से लिखा है कि कैसे गांधी के अनशन के कारण उन्हें मजबूरी में समझौता करना पड़ा और कैसे संयुक्त निर्वाचन ने अनुसूचित जातियों की स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति को कमजोर कर दिया।
*BAWS खंड 2 – सरकारी दस्तावेज और बहस:* इसमें गोलमेज सम्मेलनों की आधिकारिक कार्यवाही है। इसमें _31 जुलाई 1933 को Joint Committee on Indian Constitutional Reform में पूना पैक्ट पर हुई चर्चा_ का पूरा ट्रांसक्रिप्ट है।
*BAWS खंड 17 – भाषण और परिशिष्ट:* इसमें बाबा साहब के भाषणों का कालानुक्रमिक संग्रह है। इसमें पूना पैक्ट से ठीक पहले के पत्र-व्यवहार और समझौते की पृष्ठभूमि दर्ज है।

*पूना पैक्ट के पूरे 9 सिद्धांत – BAWS Volume 9 के अनुसार*

*सिद्धांत 1:* प्रांतीय विधानमंडलों में सामान्य निर्वाचन मंडल में से दलित वर्ग के लिए 148 सीटें आरक्षित होंगी – मद्रास 30, बॉम्बे-सिंध 15, पंजाब 8, बिहार-उड़ीसा 18, मध्य प्रांत 20, असम 7, बंगाल 30, संयुक्त प्रांत 20।
*सिद्धांत 2:* इन आरक्षित सीटों पर चुनाव संयुक्त निर्वाचन से होगा। हर आरक्षित सीट के लिए उस क्षेत्र के दलित मतदाता पहले एक प्राथमिक चुनाव में 4 उम्मीदवारों का पैनल चुनेंगे। फिर आम चुनाव में सभी हिंदू-दलित मिलकर उन 4 में से एक को चुनेंगे।
*सिद्धांत 3:* केंद्रीय विधानमंडल में भी दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व इसी संयुक्त निर्वाचन और प्राथमिक चुनाव वाले पैनल सिस्टम से होगा।
*सिद्धांत 4:* केंद्रीय विधानमंडल में ब्रिटिश भारत के लिए सामान्य निर्वाचन मंडल की कुल सीटों में से 18% सीटें दलित वर्ग के लिए आरक्षित होंगी।
*सिद्धांत 5:* पैनल बनाने वाला ये प्राथमिक चुनाव सिस्टम पहले 10 साल के बाद खत्म हो जाएगा, अगर उससे पहले दोनों समुदाय आपसी सहमति से खत्म करना चाहें तो पहले भी खत्म हो सकता है।
*सिद्धांत 6:* प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में आरक्षित सीटों वाला ये सिस्टम तब तक चलता रहेगा जब तक दोनों संबंधित समुदाय आपसी सहमति से कोई दूसरा फैसला नहीं लेते।
[24-09-2026 06:58 PM] Kulranjan Jha Prathvi News: *सिद्धांत 7:* दलित वर्ग के लिए केंद्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों में वोट देने का अधिकार लोथियन कमेटी रिपोर्ट में बताए अनुसार होगा।
*सिद्धांत 8:* दलित वर्ग का सदस्य होने के कारण किसी को भी स्थानीय निकायों के चुनाव या सरकारी नौकरियों में अयोग्य नहीं माना जाएगा। हर संभव कोशिश की जाएगी कि इन क्षेत्रों में दलित वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
*सिद्धांत 9:* हर प्रांत में शिक्षा के अनुदान में से एक उचित रकम दलित वर्ग के लोगों को शैक्षणिक सुविधाएँ देने के लिए अलग रखी जाएगी।

बाबा साहब की अंतिम टिप्पणी और आज का संदेश

बाबा साहब ने BAWS खंड 9 में कहा था:
> “पूना पैक्ट ने अछूतों को हिंदुओं का बंधुआ बना दिया। अब आरक्षित सीट पर जो जीतेगा, वो सवर्ण हिंदुओं की कृपा से जीतेगा, दलितों की इच्छा से नहीं।”

*24 सितंबर को याद करना मतलब ये याद करना:*
1. हमें राजनीतिक अधिकार भीख में नहीं, कुर्बानी से मिले।
2. Separate Electorate हमारा जन्मसिद्ध अधिकार था, जो छिन गया।
3. आरक्षण को सिर्फ नौकरी मत समझो, ये राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई की निशानी है।

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