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25 एवं 26 नवंबर को होगा दो दिवसीय आयोजन
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मधुबनी
मिथिला की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत के संरक्षण, संवर्द्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 25 एवं 26 नवंबर 2026 को ऐतिहासिक सौराठ सभागाछी, रहिका में दो दिवसीय सौराठ महोत्सव–2026 का आयोजन किया जाएगा। विभागीय सांस्कृतिक कैलेंडर 2026-27 के तहत आयोजित होने वाले इस महोत्सव को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
जिला पदाधिकारी, मधुबनी श्री आनंद शर्मा द्वारा महोत्सव के सफल, सुव्यवस्थित एवं भव्य आयोजन के लिए विस्तृत आदेश निर्गत किया गया है। इसके तहत विभिन्न विभागों एवं संबंधित पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
सौराठ सभागाछी मिथिला की प्राचीन सामाजिक परंपराओं, ऐतिहासिक पंजी प्रथा तथा पंजीकारों की महत्वपूर्ण भूमिका का विशिष्ट केंद्र रहा है। यह स्थल मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान एवं सामाजिक इतिहास का जीवंत प्रतीक है। महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य इस ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को मंच प्रदान करना तथा मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
महोत्सव से पूर्व महाविद्यालयों में होंगी परिचर्चाएं
सौराठ सभा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पंजी प्रथा, सामाजिक परंपराओं एवं मिथिला की सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों एवं युवाओं को परिचित कराने के उद्देश्य से महोत्सव से पूर्व जिले के विभिन्न महाविद्यालयों में परिचर्चा सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें विषय-विशेषज्ञों, विद्वानों एवं इतिहास के जानकारों को आमंत्रित कर सौराठ सभा के ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्व पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सौराठ की विरासत पर बनेगी शोधपरक वृत्तचित्र
महोत्सव के तहत सौराठ सभागाछी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्ता पर आधारित एक शोधपरक वृत्तचित्र का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए ऐतिहासिक सौराठ सभा समिति, संबंधित विद्वानों एवं विषय-विशेषज्ञों के सहयोग से ऐतिहासिक अभिलेख, आलेख, दुर्लभ छायाचित्र, प्रामाणिक तथ्य एवं साक्षात्कार संकलित किए जाएंगे।
विद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच होंगी सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं
महोत्सव के दोनों दिवस विद्यालय अवधि के दौरान जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच समूह लोकगीत एवं समूह लोकनृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला युवा पदाधिकारी एवं जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी को आपसी समन्वय स्थापित कर अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को मिथिला की लोककला, लोकगीत एवं लोकनृत्य की परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
मिथिला की कला एवं हस्तशिल्प के लगेंगे विशेष स्टॉल
महोत्सव परिसर में मिथिला की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प पर आधारित विभिन्न स्टॉल अधिष्ठापित किए जाएंगे। इनमें मिथिला चित्रकला, सिक्की कला, बांस एवं अन्य पारंपरिक शिल्पकला, पुस्तक मेला तथा मिथिला की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से संबंधित प्रदर्शनी प्रमुख रूप से शामिल होंगी।
इन स्टॉलों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, साहित्यकारों एवं पारंपरिक कला से जुड़े लोगों को अपनी कला एवं उत्पादों के प्रदर्शन तथा बिक्री का अवसर प्राप्त होगा।
मिथिलाक्षर के संरक्षण के लिए आयोजित होंगी कार्यशालाएं
मिथिला की प्राचीन लिपि मिथिलाक्षर के संरक्षण, संवर्द्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए महोत्सव से पूर्व जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मिथिलाक्षर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को मिथिलाक्षर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, महत्व एवं लेखन पद्धति से अवगत कराने के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पंजीकारों एवं विरासत संरक्षकों को किया जाएगा सम्मानित
सौराठ सभागाछी एवं मिथिला की ऐतिहासिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पंजीकारों तथा प्राचीन पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण के क्षेत्र में दीर्घकाल से उत्कृष्ट कार्य कर रहे व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
मैथिली कलाकारों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को मिलेगी प्राथमिकता
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सौराठ महोत्सव के दोनों दिवस संध्या काल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महोत्सव की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए मैथिली भाषी कलाकारों तथा मैथिली परंपरा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय कलाकारों के चयन एवं आमंत्रण के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, मधुबनी की अध्यक्षता में कलाकार चयन समिति गठित की गई है।
सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं की रहेगी समुचित व्यवस्था
महोत्सव के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी, सदर मधुबनी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर मधुबनी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि सौराठ महोत्सव–2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित न रहकर मिथिला की ऐतिहासिक पहचान, सामाजिक परंपराओं, लोककलाओं, साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बने। इसके माध्यम से सौराठ सभागाछी की गौरवशाली पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों एवं परंपराओं से जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल की जाएगी।