उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक परिवार की दर्दभरी स्थिति व्यवस्था और सरकारी योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विकास खंड क्षेत्र के महुअवा खुर्द गांव में रहने वाला यह परिवार बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर है।

गांव की निवासी रजनति देवी अपने मानसिक रूप से अस्वस्थ पति बिट्टू यादव और चार बच्चों के साथ एक जर्जर झोपड़ी में रह रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और जीवन यापन के लिए उन्हें रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि पहले बिट्टू यादव मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद अब घर की पूरी जिम्मेदारी रजनति देवी के कंधों पर आ गई है। सीमित संसाधनों और अस्थिर आय के चलते परिवार की हालत लगातार खराब होती जा रही है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस परिवार को अब तक किसी भी प्रमुख सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। न तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिला और न ही मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। इसके अलावा, परिवार के पास शौचालय की सुविधा भी नहीं है और हेल्थ कार्ड जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से भी वे वंचित हैं।

हालांकि, परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है, लेकिन उसमें भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जहां परिवार में कुल छह सदस्य हैं, वहीं राशन कार्ड में केवल तीन लोगों के नाम दर्ज हैं। साथ ही, कार्ड अंत्योदय श्रेणी में होने के बजाय पात्र गृहस्थी श्रेणी में जारी किया गया है, जिससे उन्हें मिलने वाली सहायता भी सीमित हो गई है।

स्थानीय स्तर पर इस परिवार की स्थिति ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पात्र होने के बावजूद इस परिवार को योजनाओं का लाभ न मिलना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच पा रही हैं। जरूरतमंद परिवारों तक लाभ न पहुंचना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है, जिसे समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है।

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