मध्य प्रदेश पुलिस में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार वर्ष 2027 में प्रस्तावित कैडर रिव्यू के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में 15 से 20 नए आईपीएस पद सृजित किए जा सकते हैं। वर्तमान में राज्य में आईपीएस संवर्ग के 319 स्वीकृत पद हैं।
देरी से होता रहा कैडर रिव्यू
गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार आईपीएस कैडर रिव्यू प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया लगातार विलंब से होती रही है। वर्ष 1998 के बाद 2003 में कैडर रिव्यू हुआ, जबकि अगला रिव्यू 2008 के बजाय 2010 में किया गया। इसके बाद 2015 में समीक्षा हुई और वर्ष 2020 में होने वाला रिव्यू भी दो साल की देरी से 2022 में पूरा हो सका।
अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर नियमित समीक्षा होती रहती तो अब तक एक अतिरिक्त कैडर रिव्यू और हो चुका होता, जिससे 15 से 20 नए आईपीएस पद पहले ही बढ़ाए जा सकते थे।
नई जरूरतों के आधार पर बढ़ते हैं पद
कैडर रिव्यू के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं, नए जिलों के गठन, पुलिस इकाइयों के विस्तार और प्रशासनिक जरूरतों का आकलन किया जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर आईपीएस अधिकारियों के नए पद सृजित किए जाते हैं।
SPS अधिकारियों को मिलेगा प्रमोशन का अवसर
कैडर रिव्यू का सबसे बड़ा लाभ राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के अधिकारियों को मिलता है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार नए सृजित होने वाले आईपीएस पदों में लगभग 25 प्रतिशत पद एसपीएस अधिकारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षित रहते हैं।
यही कारण है कि एसपीएस अधिकारी नियमित कैडर रिव्यू की मांग लंबे समय से करते रहे हैं। पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं होने के कारण कई अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
बड़े बैचों से भी बढ़ रही पदोन्नति में देरी
गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक, राज्य पुलिस सेवा के कुछ बैचों में अधिकारियों की संख्या अधिक होने से पदोन्नति की प्रक्रिया और लंबी हो जाती है। वर्तमान स्थिति में कई अधिकारियों को आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति का अवसर करीब 28 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद मिल पा रहा है।
