मधुबनी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पटना की ओर से गुरुवार को मधुबनी में पुलिस अधिकारियों के लिए वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध की रोकथाम पर एक वृहद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों के उप पुलिस अधीक्षकों सहित विभिन्न श्रेणी के 100 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने तथा आम नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना था। इस दौरान बढ़ते वित्तीय अपराधों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका, वित्तीय साक्षरता तथा उपभोक्ता संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को भारतीय रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली, विभिन्न नियामकीय गतिविधियों, एनबीएफसी, भारतीय बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताओं तथा अनिगमित निकायों और जमा स्वीकार करने वाली संस्थाओं से जुड़े नियमों और दिशानिर्देशों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest), मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी, वित्तीय साइबर अपराध, प्रतिरूपण (Impersonation), ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, ट्रेडिंग घोटाले, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े फर्जीवाड़े तथा अवैध लोन ऐप्स जैसे नवीनतम साइबर और वित्तीय अपराधों के तरीकों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही इनसे बचाव के प्रभावी उपायों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अविनियमित जमा योजनाओं के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक की पहल, जमाकर्ताओं के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय तथा वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
इसके अलावा फर्जी सिम कार्ड के जरिए होने वाले साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली, सिम जारी करने की वर्तमान प्रक्रिया तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंटेलिजेंस के माध्यम से ऐसे अपराधों की रोकथाम में दूरसंचार विभाग की भूमिका पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के अधिकारियों ने वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं कई उप पुलिस अधीक्षकों ने वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच के अपने अनुभव साझा किए, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने केस डायरी तैयार करने के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पुलिस विभाग को सशक्त बनाने के लिए विकसित नए डिजिटल पोर्टलों और तकनीकी पहलों की भी जानकारी दी गई, जिसकी प्रतिभागियों ने सराहना की।
पुलिस अधिकारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक की इस पहल को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वित्तीय अपराधों से जुड़े नियामकीय और कानूनी ढांचे को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला है। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करने में भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित होगा। प्रतिभागियों ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से उनके कौशल और क्षमता में वृद्धि होगी तथा बिहार में साइबर और वित्तीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम का आयोजन भारतीय रिजर्व बैंक, पटना के उप महाप्रबंधक नीरज कुमार के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक, पुलिस विभाग और आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया।
