संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने सोमवार को किशोरी के अपहरण व हत्या के मामले में ज्ञान्ती देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई व एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
वहीं, अपहरण के मामले में सात वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई । अदालत ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या की घटना के एक साल के भीतर अदालत का फैसला आ गया।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज इस मामले में एक वर्ष के भीतर फैसला आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने ज्ञान्ती देवी की उम्र 46 वर्ष होने और उसके परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करने का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की।
सहायक लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने किशोरी की कम उम्र और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आजीवन कारावास समेत अन्य सजाएं सुनाईं।
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत अपहरण के लिए सात वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 103(1) के तहत हत्या के लिए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
बेटी को वापस लाने की कोशिश में पिता ने खटखटाए थे कई दरवाजे
चार नवंबर 2025 की रात गांव के चौकीदार ने किशोरी मौत की सूचना दी। इसके बाद किशोरी के पिता शंकर मांझी ने अपनी पत्नी राजकली देवी के साथ भुअरहवा टोला पूर्वी ढोकनी पहुंचे। वहां संबंधित घर में उनकी बेटी का शव जमीन पर पड़ा मिला।
सात नवंबर 2025 को शंकर मांझी ने गोबरहिया थाना कांड संख्या 16/25 दर्ज कराया। आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को शादी की नीयत से बहला-फुसलाकर अपहरण किया गया था।
उन्होंने भुअरहवा टोला पूर्वी ढोकनी निवासी अनिल कुमार उर्फ ओरल पर बेटी को ले जाने का आरोप लगाया था। बेटी को वापस लाने के लिए जब वह स्वामीनाथ मांझी के घर पहुंचे तो उन्हें बेटी को लौटाने से इन्कार कर दिया गया। इस दौरान गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
घटनास्थल पर बिखरी थीं लाल रंग की टूटी चूड़ियां
मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों की कड़ियों में चूड़ियों का साक्ष्य भी महत्वपूर्ण रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जिस कमरे में 12 वर्षीय दुर्गा कुमारी का शव पड़ा था, वहां लाल रंग की टूटी हुई कांच की चूड़ियां बिखरी मिली थीं।
वहीं, घटना के अगले दिन गिरफ्तार अभियुक्त ज्ञान्ती देवी के बाएं हाथ में लाल रंग की चार चूड़ियां और दाएं हाथ में काले रंग की प्लास्टिक की एक चूड़ी पहनी हुई थी।
अभियोजन पक्ष ने अभियुक्त के हाथ में मौजूद लाल चूड़ियों और घटनास्थल पर मिली टूटी चूड़ियों की समानता को साक्ष्य की अहम कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया।
