अमर रिपब्लिक मऊगंज।
मऊगंज का इतिहास रहा है कि यहां पदस्थ होने वाले कई अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान कोई न कोई ऐसा निर्णय जरूर छोड़ जाते हैं, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहती है। ताजा मामला नगर परिषद मऊगंज से जुड़ा हुआ है, जहां मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) राहुल शर्मा के स्थानांतरण के बाद रातोंरात किए गए कथित भुगतानों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
नगर परिषद के पूर्व सीएमओ महेश पटेल के कार्यकाल को लेकर लगातार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में उनके स्थानांतरण के बाद आमजन को उम्मीद थी कि नई कार्यप्रणाली के माध्यम से नगर परिषद की व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और लंबित शिकायतों पर अंकुश लगेगा। लेकिन राहुल शर्मा के स्थानांतरण की खबर सामने आते ही एक नया विवाद जन्म लेता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद आनन-फानन में लगभग 40 लाख रुपये के भुगतान किए गए। सूत्र बताते है कि यह भुगतान बिजली सामग्री एवं स्वच्छता उपकरणों की खरीदी से संबंधित चार अलग-अलग बिलों के एवज में किया गया। जानकारी के मुताबिक एक बिल लगभग 18 लाख रुपये, दूसरा 6 लाख 74 हजार रुपये, तीसरा 6 लाख 78 हजार रुपये तथा चौथा लगभग 10 लाख रुपये का बताया जा रहा है।
चर्चा का विषय यह नहीं है कि भुगतान किया गया, बल्कि यह है कि स्थानांतरण आदेश प्राप्त होने के बाद इतनी जल्दबाजी में भुगतान करने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी❓
यदि संबंधित बिल लंबे समय से लंबित थे तो उनका भुगतान पहले क्यों नहीं किया गया?
और यदि भुगतान नियमों के तहत किया गया है तो फिर ट्रांसफर के बाद ही इसे प्राथमिकता क्यों दी गई?
सूत्रों का दावा है कि उक्त भुगतान नेशनल टेंडर्स ज्योति टेंडर्स, रीवा के है उक्त दोनों फर्म के प्रोपराइटर अरविंद गुप्ता है
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि संबंधित खरीदी की प्रक्रिया, सामग्री की आपूर्ति, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया क्या निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं।
हालांकि इस पूरे मामले में सीएमओ राहुल शर्मा का कहना है कि यह पुराने लंबित बिलों का भुगतान था और नियमों के अनुसार भुगतान निकाला गया है। लेकिन उनका यह जवाब भी कई नए प्रश्न खड़े कर रहा है। यदि बिल वास्तव में पुराने थे तो फिर उनका भुगतान स्थानांतरण आदेश आने के बाद ही क्यों किया गया?
क्या नगर परिषद प्रशासन को पहले इन भुगतानों की आवश्यकता महसूस नहीं हुई थी?
नगर परिषद मऊगंज पहले भी वित्तीय मामलों और खरीदी प्रक्रियाओं को लेकर विवादों में रही है। ऐसे में स्थानांतरण की बेला में किए गए लाखों रुपये के भुगतान ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आमजन की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार थी या फिर जल्दबाजी के पीछे कोई और कारण था।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को सामान्य वित्तीय प्रक्रिया मानकर छोड़ देते हैं या फिर उठ रहे सवालों के मद्देनजर जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाते हैं। फिलहाल नगर परिषद मऊगंज में हुए इस भुगतान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
