[07-10-2026 11:48 AM] Kulranjan Jha Prathvi News: आपकी सेहत, आपका ‘आभा’: पर्चे के झंझट से मिल रही मुक्ति, डिजिटल हो रहा हर मरीज का रिकॉर्ड
गौरवपूर्ण उपलब्धि: जिला ने राज्य में पाया आज दूसरा स्थान
जिलाधिकारी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग का सख्त निर्देश
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मधुबनी,
5 अक्टूबर, 2026
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम ) के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा रही है। मिशन को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत नागरिकों की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों, स्वास्थ्य संस्थानों और मरीजों के इलाज से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य रूप से आभा (एबीडीएम) कार्ड निर्माण, हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर ) और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर ) लिंकिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में इलाज के दौरान पुराने पर्चे और जांच रिपोर्ट साथ लेकर चलने की परेशानी न हो।
मिशन मोड में बन रहे आभा कार्ड:
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सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया जिले के नागरिकों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान बनाने के लिए बड़े पैमाने पर
आभा आईडी तैयार की जा रही है। इसके तहत जिले में 2682968 कार्ड बने है। आज जिले में 740 आभा कार्ड बने हैं तथा जिला ने राज्य स्तर पर आज दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा द्वारा सिविल सर्जन एवं सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सक्रिय एवं तत्पर कर अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से एम आशा ऐप का इस्तेमाल कर घर-घर जाकर लोगों का आभा कार्ड बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविरों में भी विशेष काउंटर लगाकर एएनएम, सीएचओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा मौके पर ही आभा आईडी तैयार की जा रही है। स्कूल, कॉलेज, जीविका एवं स्वयं सहायता समूहों की बैठक, आंगनबाड़ी केंद्र तथा ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (भीएचएसएनडी ) के दौरान भी विशेष अभियान चलाकर लोगों को आभा से जोड़ा जा रहा है। पीडीएस दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आभा कार्ड निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान उपलब्ध कराई जा सके।
डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक का होगा डिजिटल पंजीकरण:
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आयुष्मान भारत योजना के डीपीसी कुमार प्रियरंजन ने बताया एबीडीएम के तहत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रोफेशनल्स और संस्थानों का डिजिटल पंजीकरण भी किया जा रहा है। हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) के तहत सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में कार्यरत डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट तथा पैरामेडिकल कर्मियों का पंजीकरण कराया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स की प्रमाणित डिजिटल पहचान तैयार होगी।वहीं हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर ) के माध्यम से जिले के सरकारी एवं निजी अस्पताल, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है।
ओपीडी से डिस्चार्ज तक डिजिटल हो रहा रिकॉर्ड:
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एबीडीएम के तहत मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को भी डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है। सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले ओपीडी और आईपीडी मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (एचएचआर) तैयार करने पर जोर दिया गया है।मरीज के अस्पताल में पंजीकरण से लेकर डॉक्टर के परामर्श, नर्सिंग केयर, लैब जांच, फार्मेसी और डिस्चार्ज तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा को भव्या पोर्टल अथवा एबीडीएम -सक्षम सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज कर मरीज की आभा आईडी से लिंक किया जा रहा है। इससे मरीज के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को भविष्य में जरूरत पड़ने पर डिजिटल माध्यम से देखा और उपयोग किया जा सकेगा।
सतत एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की सुदृढ़ व्यवस्था :
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जिला पदाधिकारी के निर्देश पर एबीडीएम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लगातार समीक्षा एवं मानिटरिंग की जा रही है। प्रखंड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को एबीडीएम नोडल पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। अभियान में किसी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही नहीं हो, इसके लिए नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा की जा रही है। आम लोगों से अपील की गई है कि अस्पताल या
[07-10-2026 11:48 AM] Kulranjan Jha Prathvi News: स्वास्थ्य शिविर में पहुंचने पर स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और अपनी आभा आईडी जरूर बनवाएं। साथ ही इसे अपने इलाज से संबंधित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड से लिंक कराएं। इससे आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।