गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में तौकीर रिजवान अहमद शेख और हुजैफा फारूकी हाशमी को विशेष विशिष्ट अदालत से डिफाल्ट जमानत नहीं मिली।
एनआईए एक्ट और यूएपीए मामलों की सुनवाई कर रही राउज एवेन्यू स्थित विशेष विशिष्ट अदालत की पीठासीन अधिकारी किरण बंसल ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
आरोपियों ने जांच एजेंसी की ओर से निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने और जांच की अवधि बढ़ाने के आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए डिफाल्ट जमानत मांगी थी।
डिफाल्ट (वैधानिक) जमानत वह कानूनी अधिकार है जो किसी आरोपी को तब मिलता है जब पुलिस या जांच एजेंसी निर्धारित समय के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाती है।
अदालत ने कहा कि जांच पूरी करने के लिए 90 दिन की अवधि बढ़ाकर 180 दिन तक करने की प्रक्रिया में 12 अगस्त 2026 को विस्तृत आदेश पारित किया गया था।
75 दिन की अतिरिक्त अवधि दी
अदालत के मुताबिक, दोनों आरोपियों के अधिवक्ता उस समय मौजूद थे और उनकी दलीलें सुनने के बाद ही जांच पूरी करने के लिए 75 दिन की अतिरिक्त अवधि दी गई थी। यह अवधि 16 अगस्त से 29 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई थी।
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अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि जांच की अवधि बढ़ाने का कोई वैध आदेश रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। इसी आधार पर दोनों की डिफॉल्ट जमानत याचिकाओं में कोई दम नहीं मानते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
