चर्चित लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ा कथित भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर शेयर करने के मामले में अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह बुधवार सुबह तक इस केस की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-26 पुलिस थाने में 19 अप्रैल को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

आरोप है कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संबंधित एक कथित भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो साझा किया गया था। इस मामले में पुलिस ने मधु पूर्णिमा किश्वर को आरोपी बनाया है।

इससे पहले चंडीगढ़ की जिला अदालत ने 6 मई को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में मधु किश्वर ने कहा है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और अस्थिर हैं। याचिका में दलील दी गई है कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सामग्री नहीं रखी गई, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने जानबूझकर कोई आपराधिक कृत्य किया हो।

याचिका में यह भी कहा गया है कि विवादित वीडियो क्लिप न तो उन्होंने बनाई और न ही मूल रूप से अपलोड की। उनके अनुसार यह सामग्री किसी संदिग्ध और गैर-पहचाने इंटरनेट मीडिया हैंडल से पहले पोस्ट की गई थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने स्वयं सार्वजनिक तौर पर यह आशंका व्यक्त की थी कि संबंधित वीडियो संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक की मदद से तैयार किया गया भ्रामक कंटेंट हो सकता है।

मधु किश्वर ने अपनी याचिका में यह तर्क भी रखा है कि एफआईआर में स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि वीडियो मूल रूप से “परदीप कौर ढिल्लों” नामक व्यक्ति द्वारा पोस्ट किया गया था।

शिकायत में कई अन्य इंटरनेट मीडिया लिंक और व्यक्तियों के नामों का भी उल्लेख है, लेकिन इसके बावजूद केवल उन्हें ही आरोपी बनाकर नामजद किया गया। याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसियों ने मामले में चयनात्मक कार्रवाई की है और केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाया गया है। ऐसे में गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की जानी चाहिए।

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