जिला पंचायत संसाधन केंद्र (DPRC), मधुबनी द्वारा दिनांक 29 एवं 30 अक्टूबर 2026 को सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) के अंतर्गत थीम-3 : बाल हितैषी पंचायत (Child Friendly Panchayat) एवं थीम-9 : महिला हितैषी पंचायत (Women Friendly Panchayat) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मधुबनी जिले के सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), महिला पर्यवेक्षिका (LS), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM-WCDC) एवं जिला मिशन समन्वयक (DMC-WCDS) ने भाग लिया।

कार्यक्रम में *सहायक जिला पंचायत राज पदाधिकारी (ADPRO) श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव*, DPRC के नोडल पदाधिकारी श्री विकास मिश्रा तथा नोडल पदाधिकारी-RTPS श्री रजनीश कुमार प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे। प्रशिक्षकों द्वारा दोनों विषयों के विभिन्न आयामों, उद्देश्यों एवं पंचायत स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बाल अधिकारों की सुरक्षा, बच्चों के समग्र विकास, पोषण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, समानता, अधिकारों एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण को सुनिश्चित करने हेतु विभागीय समन्वय और क्षमता संवर्धन को बढ़ावा देना था।

थीम-3 : बाल हितैषी पंचायत के अंतर्गत बच्चों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण का निर्माण, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी एवं बाल शोषण की रोकथाम, विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान तथा बाल सभा एवं बालिका सभा के माध्यम से बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

वहीं, थीम-9 : महिला हितैषी पंचायत के अंतर्गत महिलाओं के अधिकार, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा, लैंगिक समानता, महिला सहभागिता एवं आजीविका संवर्धन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि बाल एवं महिला हितैषी पंचायतों के निर्माण के लिए पंचायती राज संस्थाओं तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। साथ ही पंचायत स्तर पर संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायतों को समावेशी, सुरक्षित, संवेदनशील एवं विकासोन्मुख बनाने की दिशा में क्षमता संवर्धन का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

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