बिहार के कोसी क्षेत्र में अब देसी मछली पालन को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार की नई पहल से सहरसा समेत बिहार के किसानों और मत्स्य पालकों को अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। सरकार ने देसी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और व्यावसायिक उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र किसानों को मछली पालन की निर्धारित इकाई लागत पर 60 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है, बल्कि तेजी से कम हो रही देसी मछलियों की प्रजातियों को भी संरक्षित करना है।
दरअसल, बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की गई है। यह योजना राज्य के सभी 38 जिलों में लागू की गई है। इसके तहत मछली पालक पारंपरिक मछली पालन के साथ-साथ देसी मछलियों की अलग-अलग प्रजातियों का व्यावसायिक उत्पादन कर सकेंगे।
योजना में मुख्य रूप से माइनर कार्प यानी छोटी देसी मछलियों का पालन, कैट फिश और अन्य वायु-श्वासी मछलियों का पालन, व्यावसायिक झींगा पालन और मोती उत्पादन को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्धारित इकाई लागत का 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराएगी। इससे किसानों को मछली पालन शुरू करने के लिए अपनी जेब से कम पूंजी लगानी पड़ेगी।
इस योजना का कोसी क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष महत्व है। सहरसा और आसपास के इलाकों में जल संसाधनों और तालाबों की उपलब्धता के कारण मत्स्य पालन की अच्छी संभावनाएं हैं। हालांकि, अब तक कई किसान पारंपरिक तरीके से मछली पालन करते रहे हैं। नई योजना के माध्यम से उन्हें देसी प्रजातियों के उत्पादन और मत्स्य पालन के नए विकल्पों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
योजना के तहत निजी तालाबों के अलावा सरकारी तालाबों में भी पट्टाधारक किसान निर्धारित शर्तों के अनुसार मछली पालन कर सकेंगे। इसके लिए न्यूनतम 0.25 एकड़ और अधिकतम एक एकड़ जलक्षेत्र की सीमा निर्धारित की गई है। एक व्यक्ति या परिवार को योजना के तहत किसी एक ही घटक का लाभ दिया जाएगा। यानी कोई लाभार्थी एक साथ कई घटकों में अनुदान का लाभ नहीं ले सकेगा।
सरकार की इस पहल से देसी मछलियों की उन प्रजातियों को भी संरक्षण मिलने की उम्मीद है, जिनकी उपलब्धता में समय के साथ कमी आई है। माइनर कार्प और कैट फिश जैसी प्रजातियों के व्यावसायिक उत्पादन से स्थानीय बाजारों में देसी मछलियों की उपलब्धता बढ़ सकती है। वहीं, झींगा और मोती पालन जैसे विकल्प किसानों के लिए अतिरिक्त रोजगार और आय के साधन बन सकते हैं।
मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई थी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई थी। इच्छुक किसानों को बिहार मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करना था। अब आवेदन की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। ऐसे में नए आवेदन या आगामी चरण से संबंधित जानकारी के लिए किसानों को जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क करना होगा।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार की इस योजना से कोसी क्षेत्र में मत्स्य पालन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अगर किसान आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और सरकारी अनुदान का लाभ लेकर इस व्यवसाय को अपनाते हैं, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ देसी मछलियों के संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।
