बिहार के भागलपुर में नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। निगरानी विभाग ने उन 1625 शिक्षकों की मेधा सूची और मूल आवेदन पत्रों की तलाश शुरू कर दी है, जिनके दस्तावेजों में कमी पाए जाने के बाद उनके फोल्डर पहले वापस कर दिए गए थे। शुक्रवार को पटना से पहुंची निगरानी विभाग की पांच सदस्यीय टीम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय और नगर निगम के प्रखंड संसाधन केंद्र यानी बीआरसी में पहुंचकर पुराने रिकॉर्ड खंगाले। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग और नियोजन इकाइयों में हलचल बढ़ गई है।
दरअसल, भागलपुर जिले में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और अन्य प्रमाणपत्रों की जांच लंबे समय से चल रही है। इस जांच के दौरान निगरानी विभाग को कई शिक्षकों के फोल्डरों में जरूरी दस्तावेज नहीं मिले थे। खास तौर पर मेधा सूची और नियोजन समिति के पास अभ्यर्थियों की ओर से जमा किए गए मूल आवेदन पत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं थीं। इसके कारण करीब एक साल पहले जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से भेजे गए 1625 फोल्डरों को निगरानी विभाग ने वापस कर दिया था।
भागलपुर में 1625 नियोजित शिक्षकों की मेधा सूची की फिर होगी जांच, निगरानी विभाग ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए
अब इन्हीं दस्तावेजों की तलाश के लिए निगरानी विभाग की टीम दोबारा भागलपुर पहुंची है। टीम का नेतृत्व डीएसपी स्तर की अधिकारी कर रही थीं। पांच सदस्यीय टीम ने सबसे पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में करीब आधे घंटे तक संबंधित फाइलों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसके बाद टीम जिला स्कूल परिसर स्थित नगर निगम के बीआरसी पहुंची, जहां लगभग एक घंटे तक पुराने दस्तावेजों को खंगाला गया।
जांच के दौरान टीम ने जिला शिक्षा कार्यालय को 10 शिक्षकों की एक विशेष सूची भी सौंपी है। साथ ही संबंधित प्रखंडों से इन शिक्षकों के नियोजन से जुड़ी जानकारी जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। निगरानी विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि नियोजन के समय अभ्यर्थियों की ओर से जमा किए गए आवेदन और मेधा सूची की मूल प्रतियां कहां उपलब्ध हैं।
इस मामले में नियोजन समितियों और बीआरसी के बीच दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। नियोजन समितियों का कहना है कि नियोजन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी जरूरी कागजात बीआरसी को सौंप दिए गए थे। वहीं, बीआरसी की ओर से दस्तावेज प्राप्त नहीं होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि बीआरसी के गोदाम में कुछ पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं, लेकिन लंबे समय तक रखे रहने के कारण कई दस्तावेजों के प्रिंट और लिखावट खराब हो चुके हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों से जुड़ी जानकारियों का मिलान करना भी चुनौती बन गया है।
गौरतलब है कि भागलपुर जिले में कुल 8256 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 2532 शिक्षकों के फोल्डरों की जांच लंबित है। इनमें 1625 ऐसे फोल्डर भी शामिल हैं, जिन्हें जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण निगरानी विभाग ने वापस कर दिया था।
इससे पहले निगरानी विभाग की जांच में भागलपुर जिले के 120 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। संबंधित शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें सेवा से हटाया गया। इसके अलावा नियोजन प्रक्रिया से जुड़े 200 से अधिक नियोजन इकाइयों और पंचायत सचिवों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
दरअसल, नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की यह जांच पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक नियुक्तियों में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और नियोजन प्रक्रिया की वास्तविकता की जांच करना है। निगरानी विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियुक्ति के समय किसी अभ्यर्थी ने फर्जी प्रमाणपत्र या गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल तो नहीं किया था।
अब निगरानी विभाग की दोबारा सक्रियता के बाद भागलपुर में लंबित जांच पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, 1625 फोल्डरों से जुड़ी मेधा सूची और मूल आवेदन पत्रों की उपलब्धता अभी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन और संबंधित नियोजन इकाइयों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच की आगे की दिशा तय होगी। ऐसे में अब शिक्षा विभाग के साथ-साथ उन शिक्षकों की भी नजर इस पूरी कार्रवाई पर बनी हुई है, जिनके दस्तावेजों की जांच अभी बाकी है।
