भूमि सुधार एवं भू-व्यवस्था अधिनियम 1972 की धारा 118 के उल्लंघन से जुड़े मामले में उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अदालत ने राजेश कुमार अरोड़ा और पुष्पा रानी अरोड़ा द्वारा बल्ह के चक्कर में खरीदी जमीन और उस पर बने पेट्रोल पंप के ढांचे को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया। यह मामला विजिलेंस की जांच के बाद सामने आया था। 1982 में नंद लाल अरोड़ा (प्रतिवादियों के पिता) ने सोलन जिले के बासाल में मकान निर्माण के लिए धारा 118 के तहत सीमित अनुमति प्राप्त की थी।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपितों ने अपनी गैर-हिमाचली और गैर-कृषक होने की वास्तविक स्थिति को छुपाकर यह संपत्ति अर्जित की थी।
पेट्रोल पंप स्थापित किया
मामले में तीसरे पक्ष के रूप में जुड़ी सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड ने तर्क दिया कि उन्होंने वर्ष 2001 में 30 वर्ष की वैध लीज पर जमीन लेकर पेट्रोल पंप स्थापित किया है और वह इसके एक बोनाफाइड पट्टेदार हैं। हालांकि, जिला कलेक्टर ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अवैध नींव पर वैध इमारत खड़ी नहीं हो सकती।
अधिनियम की धारा 118(3डी) के तहत जैसे ही मूल हस्तांतरण शून्य घोषित होता है, उससे जुड़ी सभी लीज और अन्य वाणिज्यिक व्यवस्थाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
एसडीएम को कब्जा लेने का आदेश
सोलन की पुरानी अनुमति का दुरुपयोग कर मंडी में की गई खरीद कानून के विरुद्ध है। उन्होंने एसडीएम बल्ह को तुरंत प्रभाव से उक्त भूमि और उस पर बने ढांचे का कब्जा लेने, राज्य सरकार के पक्ष में इंतकाल दर्ज कराने और मौके पर मौजूद सामान की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
