मधुबनी, 7 सितंबर 2026। जिलाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश पर अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल हेल्थ सिस्टम की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में सामने आया कि जिले में प्रथम तिमाही के दौरान गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण में 102 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। इसमें लौकही, अंधराठाढ़ी और मधेपुर प्रखंड का प्रदर्शन बेहतर रहा। गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्शियम की निर्धारित खुराक उपलब्ध कराने में भी जिले का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया।
जिले के सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को मिलाकर कुल 6,646 प्रसव कराए गए। झंझारपुर और खुटौना प्रखंड का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। वहीं, सदर अस्पताल मधुबनी में अगस्त महीने के दौरान 159 सफल सिजेरियन प्रसव कराए गए।
शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में बताया गया कि अति कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए संचालित NRC केंद्र में झंझारपुर और खुटौना ने निर्धारित लक्ष्य से दोगुना बच्चों का दाखिला कर बेहतर प्रदर्शन किया। सदर अस्पताल स्थित SNCU में अगस्त महीने के दौरान 138 नवजात शिशुओं का सफल इलाज किया गया।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 100 प्रतिशत ऑनलाइन OPD परामर्श दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। कलुआही, खजौली, मधवापुर, मधेपुर और बेनीपट्टी PHC ने ऑनलाइन OPD परामर्श में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया।
त्वरित पंजीकरण के लिए ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा का भी व्यापक उपयोग किया गया। जिले में 76 प्रतिशत OPD परामर्श को Ayushman Bharat Health Account (ABHA) के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से जोड़ा गया। इस मामले में सदर अस्पताल मधुबनी 98 प्रतिशत उपलब्धि के साथ जिले में सबसे आगे रहा।
दवा वितरण और जांच सेवाओं की समीक्षा में सामने आया कि OPD मरीजों को निःशुल्क दवा वितरण की दर 104 प्रतिशत रही। अनुमंडलीय अस्पताल फूलपरास और राजनगर CHC का प्रदर्शन बेहतर रहा। वहीं, जिले के विभिन्न अस्पतालों में कुल 16,974 पैथोलॉजी जांच की गईं।
बैठक के दौरान जिन चिकित्सकों का ऑनलाइन OPD अनुपात 95 प्रतिशत से कम पाया गया, उनके संबंध में विभागीय समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन प्रखंडों में संस्थागत प्रसव या पैथोलॉजी जांच का प्रतिशत कम है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि जिले के लोगों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
