मधुबनी: जिले में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने समीक्षा बैठक के दौरान 288 नल-जल योजनाओं और 280 खराब चापाकलों पर गंभीर नाराजगी जताते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही सभी खराब पेयजल स्रोतों को युद्धस्तर पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि आम लोगों को स्वच्छ और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में नल-जल योजनाओं और चापाकलों के लंबे समय तक खराब रहने को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने संबंधित कार्यपालक अभियंता, प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) तथा अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक पंचायत में खराब पड़े नल-जल योजनाओं और चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही मरम्मत कार्य की प्रतिदिन निगरानी और नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन संवेदकों की लापरवाही के कारण नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा-56 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और कार्य एजेंसियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी खराब नल-जल योजनाओं और चापाकलों को पूरी तरह चालू कर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
