जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में करैला, परवल सहित अन्य सब्जियां ज्यादा हरी और ताजा दिखे तो समझें कि उसमें रासायनिक रंग का प्रयोग हुआ है। अनजाने में ताजा समझकर ऐसी सब्जियों के लगातार सेवन करने से दिल, दिमाग, गुर्दा सहित शरीर के अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। जिंदगी को बचाने के लिए उपचार पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
हरी सब्जियों में मिलाए जाते हैं ये रासायनिक रंग
मैलाकाइट ग्रीन रंग का प्रयोग करैला, परवल, बोड़ा सहित अन्य हरी सब्जियों को कृत्रिम रूप से गहरा हरा दिखाने के लिए किया जाता है। वहीं मेथानिल येलो का प्रयोग कुछ सब्जियों में चमक बढ़ाने के लिए किया जाता है। जबकि कापर सल्फेट का प्रयोग नीला थोथा मटर, लौकी आदि को हरा और ताजा दिखाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा ब्रिलियंट ग्रीन का प्रयोग हरे रंग को अधिक आकर्षक बनाने के लिए किया जाता है।
कॉपर सल्फेट से हरी मिर्च,पालक,धनिया पत्ती,करैला,भिंडी,परवल,लौकी,शिमला मिर्च,पत्ता गोभी सहित अन्य सब्जियों को रंगा जाता है। ऐसा करने पर यह कृत्रिम रूप से हरा दिखता है। ऐसा लगता है जैसे की अभी खेत से तोड़कर लाया गया हो। उसके कृत्रिम हरेपन व ताजगी को ग्राहक समझ नहीं पाते हैं। इसे बढ़िया समझकर खरीद लेते हैं। अनजाने में पूरा परिवार इसका सेवन करता है। उनकी जिंदगी पर खतरा बना रहता है।
बीच-बीच में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों,दुकानों पर छापा डालती है। गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित सब्जी के नमूने लिए जाते हैं। इसे जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला में भेजा जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत
यदि सब्जियों में प्रतिबंधित कृत्रिम रंग अथवा कापर सल्फेट की मिलावट प्रमाणित होती है तो परिस्थितियों के अनुसार धारा 26 के तहत खाद्य कारोबारी पर कार्रवाई की जाती है। वहीं धारा-27 में विभिन्न खाद्य कारोबार के विक्रेता दायरे में आते हैं,उन पर कार्रवाई होती। धारा-51 के तहत निम्नस्तरीय खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित विक्रेता पर कार्रवाई होती है। वहीं लैब रिपोर्ट में सेहत के लिए खतरनाक(असुरक्षित)मिलने पर खाद्य वस्तु बेचने वाले विक्रेता,बनाने वाले इकाई के संचालक पर कार्रवाई होती है।
पिछले साल सब्जी के तीन नमूनों में मिली मिलावट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त सतीश कुमार ने बताया कि उनकी टीम ने पिछले साल गोरखपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरैया बाईपास के निकट नवीन मंडी, खलीलाबाद शहर के पुरानी सब्जी मंडी व अन्य स्थानों से परवल,शिमला मिर्च,आलू के कुल 14 नमूने लिए गए थे। इसे जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से आई रिपोर्ट में परवल,शिमला मिर्च,आलू के तीन नमूनों में रासायनिक रंग की मिलावट पाई गई थीं। इस पर संबंधित विक्रेताओं पर एडीएम वित्त एवं राजस्व कोर्ट में वाद दायर किया गया था।
