जागरण संवाददाता, अयोध्या/लखनऊ। रामनगरी में दीपोत्सव के दसवें संस्करण की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। सात नवंबर को होने वाली सरयू महाआरती में इस वर्ष 2147 अर्चक सामूहिक आरती करेंगे। लक्ष्मण किला घाट से नया घाट और राम की पैड़ी तक होने वाली यह आरती शाम लगभग 5:20 से 5:50 बजे तक चलेगी।

दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए सरयू नदी के 56 घाटों को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। घाटों की सजावट और सामूहिक महाआरती के माध्यम से आस्था और आध्यात्मिकता का भव्य नजारा दिखेगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 2017 में 1.71 लाख दीयों से शुरू हुआ दीपोत्सव इस बार दसवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। जनभागीदारी और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ता यह आयोजन हर वर्ष नए आयाम स्थापित करता रहा है।

पिछले वर्ष 26 लाख से अधिक दीये जलाकर अयोध्या ने नया विश्व कीर्तिमान बनाया था। इस बार सात नवंबर को करीब 30 लाख दीयों से रामनगरी को जगमगाया जाएगा। इस दौरान सामूहिक सरयू आरती, अंतरराष्ट्रीय रामलीला और 2100 ड्रोन के जरिए रामायण के प्रसंगों का हवाई प्रदर्शन समारोह के प्रमुख आकर्षण होंगे।

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में होने वाली सामूहिक महाआरती प्रमुख आकर्षण होगी। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हजारों दीपों से जगमगाते घाट अयोध्या की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा की भव्य छटा प्रस्तुत करेंगे। इस महाआरती में अर्चकों की संख्या हर साल बढ़ती गई है।

2024 में 1121 और 2025 में 2128 अर्चकों ने आरती की थी, तो इस बार 2147 अर्चक महाआरती करेंगे। नौवें दीपोत्सव में गत वर्ष 2128 अर्चकों और वेदाचार्यों ने सामूहिक महाआरती कर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था।

वैश्विक पटल पर चमक रहा दीपोत्सव: अपर मुख्य सचिव
अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि दीपोत्सव अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और जनभागीदारी का प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष आयोजन का विस्तार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई दे रहा है। इस बार भी दीपों की भव्य सज्जा, सामूहिक सरयू आरती और आधुनिक तकनीक के समन्वय से दीपोत्सव को यादगार बनाया जाएगा।

 

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