सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाना अक्सर बड़ी चुनौती होती है। हरियाणा ने इस समस्या से निपटने और तकनीक के जरिए भूमि प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाते हुए ई-भूमि माॅडल तैयार किया है।
गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर ‘गतिशक्ति से प्रगति’ में पहले दिन यह माडल छाया रहा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हरियाणा के अनुभव को दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी बताया है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को किस तरह आनलाइन व्यवस्था से जोड़ा गया है। ई-भूमि व्यवस्था के जरिए जमीन की जरूरत तय करने से लेकर जमीन मालिकों से प्रस्ताव लेने और आगे की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा रहा है।
जमीन मालिक अपनी जमीन स्वेच्छा से उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव दे सकते हैं। इसके बाद जमीन के रिकार्ड और परियोजना की जरूरत के अनुसार जांच की जाती है। पूरी प्रक्रिया आनलाइन होने से संबंधित जानकारी एक जगह उपलब्ध रहती है और जमीन खरीद की प्रगति पर नजर रखना भी आसान होता है।
गंगवा ने कहा कि व्यवस्था का मकसद जमीन मालिक और सरकार के बीच प्रक्रिया को सरल बनाना है। पारदर्शी व्यवस्था से जमीन खरीद को लेकर स्पष्टता रहती है और परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
जमीन की कीमत और खरीद से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जमीन मालिक की ओर से बताई गई कीमत को सीधे अंतिम नहीं माना जाता, बल्कि तय नियमों के अनुसार मामले पर विचार किया जाता है।
गंगवा ने हरियाणा में सड़क विकास और परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की। शिविर में भूमि उपलब्धता, परियोजना क्रियान्वयन, सुरक्षित राजमार्ग, गुणवत्ता और परियोजना निगरानी जैसे विषयों पर मंथन किया जा रहा है।
ई-भूमि से एक ही जगह पूरी प्रक्रिया पर नजर
ई-भूमि व्यवस्था में जमीन की पेशकश से लेकर रजिस्ट्री, भुगतान, कब्जे और म्यूटेशन तक की जानकारी इलेक्ट्राॅनिक रूप से दर्ज होती है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है और अधिकारियों के लिए इसकी निगरानी भी आसान हो जाती है। सड़क परियोजनाओं में जमीन की उपलब्धता को लेकर पहले से तैयारी और तकनीक के इस्तेमाल से परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
