सीतामढ़ी जिले के पुपरी अंचल में भूमि अभिलेख से जुड़ी गंभीर त्रुटि के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में तत्कालीन अंचलाधिकारी, पुपरी और संबंधित राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
यह मामला हरिहरपुर निवासी मुकेश कुमार द्वारा सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में गलत जमाबंदी और दाखिल-खारिज के कारण उत्पन्न भूमि विवाद की जानकारी दी गई थी। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक पहुंचा और इसकी जांच कराई गई।
जांच में पता चला कि मौजा तेम्हुआ, थाना संख्या-72, खेसरा संख्या-1369 की कुल 21 डिसमिल भूमि में से मूल जमाबंदी रैयत मो. इस्लाम साफी ने वर्ष 2011 में निबंधित विक्रय विलेख के माध्यम से केवल 4 डिसमिल भूमि की बिक्री की थी।
लेकिन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान गंभीर लापरवाही करते हुए 4 डिसमिल के बजाय पूरी 21 डिसमिल भूमि का नामांतरण कर दिया गया। इसके कारण मूल जमाबंदी में बची हुई भूमि का रकबा शून्य दर्ज हो गया।
बाद में जब मुकेश कुमार ने भूमि खरीदने के बाद दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया, तब जांच के दौरान इस बड़ी त्रुटि का खुलासा हुआ। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन अंचलाधिकारी और संबंधित राजस्व कर्मचारी की भूमिका प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण पाई गई।
राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पहले किए गए सभी गलत दाखिल-खारिज को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश भी दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और शुद्धता उसकी प्राथमिकता है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
