नई दिल्ली। कॉलेजों से लेकर प्राइमरी स्कूलों तक और जंतर-मंतर से लेकर देश के ग्रामीण इलाकों तक, सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और व्यवस्थाओं को बहस के केंद्र में ला दिया है।

इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। अभियान से जुड़े लोगों का दावा है कि कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

NEET विवाद के बाद छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा

इससे पहले NEET पेपर लीक मामले को लेकर Gen Z युवाओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

अब सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर छोटे स्कूली बच्चों के विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के दावों ने शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं और सरकारी जवाबदेही को लेकर उठाई जा रही आवाजों ने इस मुद्दे को व्यापक चर्चा में ला दिया है।

सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों का ‘सोशल ऑडिट’

CJP की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देश के अलग-अलग हिस्सों के सरकारी स्कूलों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। अभियान का दावा है कि इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए स्कूलों की जमीनी स्थिति को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

अभियान से जुड़े लोगों के मुताबिक, ग्राउंड स्तर पर काम के दौरान कुछ राज्यों में प्रशासन के साथ टकराव की स्थिति भी बनी। हालांकि, इन दावों और संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान ने सरकारी स्कूलों की सुविधाओं, शिक्षा के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।

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