बिहार के सरकारी अस्पतालों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। कई जगह अस्पताल मौजूद हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं, तो कहीं डॉक्टर तो हैं लेकिन आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इन खामियों को दूर करने और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति बढ़ेगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।

विशेष रूप से मुंगेर जिले के खड़गपुर अनुमंडल क्षेत्र में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी और अनियमितता की शिकायतें रही हैं। निजी प्रैक्टिस पर रोक के बाद डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में अधिक समय देना होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और मरीजों को शहरों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी।

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