(संजय वर्मा)पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा (एनडीए) उम्मीदवार प्रो नवल किशोर यादव के अश्वमेघ के रथ को रोकने के लिए भूमिहार समाज का पंचायती अभियान फेल हो गया है राजद के डॉ संजीव जनसुराज की डॉ दिव्य भारती निर्दलीय संजय शर्मा विवेक शर्मा सहित पता नहीं कितने शर्मा मतलब एक ही जाति भूमिहार समाज से कई उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरने के लिए कमर कसकर भिड़े है अब एक यादव जाति के उम्मीदवार को हराने के लिए एक ही जाति भूमिहार समाज से उम्मीदवार उतरेंगे तो कितना टक्कर देंगे प्रो नवल किशोर यादव को यह कोई भी समझ सकता है आसानी से मजेदार बात यह कि भूमिहार समाज से जीतने भी उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरनेवाले है सभी के सभी गौरशिक्षक अब इन सबके बीच सबको बिठाकर एक उम्मीदवार को स्टैंड करने की बात की जा रही जो तराजू पर मेंढक तौलने जैसा साबित हो रहा हर उम्मीदवार एक दूसरे से बड़ा पहलवान साबित करने में लगा है डॉ दिव्य ज्योति खुद को मुकाबले में मजबूत बताने में लगी है तो डॉ संजीव खुद को सबसे ताकतवर बताने में लगे है अन्य उम्मीदवार भी खुद को सक्षम मजबूत बता चुनाव मैदान में डंटे रहने की बात कर रहे है दूसरी तरफ प्रो नवल किशोर यादव पांच चुनाव जीतने के बाद छठी बार सिक्सर मारने के प्रति आश्वस्त है वो वास्तविक तौर पर शिक्षक प्रतिनिधि के तौर पर अकेले उम्मीदवार है जिन्होंने पिछले 30 वर्षों में शिक्षकों के साथ अटूट भरोसा विश्वास और दिल का मजबूत रिश्ता कायम किया है और यही पूंजी उनकी अबतक और आगे भी जीत की पूंजी का सबसे बड़ा आधार है शिक्षकों के मन में यह पूरी तरह बैठ गई है कि गैर शिक्षक उम्मीदवारों पर दाव लगाना कही से उचित नहीं है शिक्षकों का भविष्य अंधकार में झोंकना है जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं जब विश्वसनीय चेहरा के तौर पर उनकी नुमाइंदगी करने के लिए प्रो नवल किशोर यादव जैसा सबल सक्षम जुझारू कर्मठ उम्मीदवार मौजूद है ऐसे में फिर वही बात घोड़ा बेचकर गधा खरीदना शिक्षकों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं
