दस वर्ष की राजनैतिक जीवन को छोड़कर स्वतंत्र जीवन जीने का संकल्प लिया हूं।आप बहुत अच्छे इंसान है लेकिन राजनीति के काले करतूतों से बेखबर है।श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवाणी जी,पूज्य मुरली मनोहर जोशी जी की भाजपा कही खो गई है।
अटल जी उस राजनीति को काल कोठरी कहा था।जहां धनबल का दबदबा रहता है।
अटल जी संसद भवन में एक सांसद के कारण लोकसभा सदन में विश्वास मत हासिल नहीं कर पाए तो उन्होंने कहा चिमटे की नोक वाली बात। वही ईमानदारी पारदर्शिता राष्ट्रवाद एकात्म मानववाद और अंत्योदय वाली भाजपा को ढूंढ़ता हूं।
पूंजीवाद से प्रभावित धनकुबेर पूंजीपति राजनीति में आए चुनाव महंगा होता गया।
करोड़पति आए चुनाव मैदान में दिखाने और दिखावे में खर्चीला चुनाव में सामान्य कार्यकर्ता मैदान में आने से डरने घबराने लगे है।
भाजपा के संस्थापक सदस्य परम पूज्य दीन दयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय सोंच जहां समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए योजना अटल जी ने बनाई और एकात्म मानववाद जहां जातिवाद खत्म होता है और मानववाद आरंभ होता है।
डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की शहादत राष्ट्रवाद की अलख वाली भाजपा को ढूंढता रहा जो एक देश एक निशान एक प्रधान की बात किए।आज स्व हित नेताओं के लिए सर्वोपरि है।समाजहित राष्ट्र हित चुनावी बोल रह गए।
लेकिन पूंजीवाद धनकुबेर आयातित भाजपाइयों ने असली भाजपाई को नकली बना दिया।असली घर बैठ गए नकली नेता बन गए।आयातित भाजपाइयों का बल्ले बल्ले हो गया। विचार धारा मौन है स्तब्ध है चुप है। पुराने कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं पूछ नहीं सुझाव और संपर्क नहीं।
और जातिवाद का दर्शन बूथ से पंचायत ,पंचायत से प्रखंड ,प्रखंड से जिला और राज्य स्तर तक दिखा।पहले बूथ से पंचायत, पंचायत से प्रखंड ,प्रखंड से जिला और जिला से प्रदेश सभी प्रदेश मिलाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनते थे।
आजकल भाजपा में खुद ही उल्टी गंगा बहने लगी है। पहले राष्ट्रीय फिर प्रदेश फिर जिला जिला से प्रखंड तब पंचायत और बूथ अध्यक्ष बनाया जाता है।जिसको मन उसको बना देना है।लोकतांत्रिक मूल्यों में बड़ा बदलाव भाजपा ने किया है।संगठनात्मक कार्य में जातीय समीकरण साधा गया। जिससे राष्ट्रवाद कमजोर हुई है।
फिर भी राष्ट्रवादी प्रखर देशभक्त होने के नाते जीत हार की समीक्षा सबको करना चाहिए।पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी कहते थे यदि प्रतिनिधि सही नहीं चुना गया तो प्रतिकार कीजिए।संगठन में गलत हो रहा है तो विरोध कीजिए।
निरंकुश तानाशाही और लोक तांत्रिक पद्धति में इतना बड़ा बदलाव जिसने भी लाया सबको बधाई हो। आगे बहुत कुछ सहना कहना बाकी है।हम तो पाहुन श्री राम और बहिन जानकी जी की कथा में आनंदित है जय सियाराम।
किसी कवि विद्वान साहित्यकार ने लिखा आज बिल्कुल सही प्रतीत होता है।
राजनीति में मित्र कठिन है।
स्व से ऊपर चरित्र कठिन है।
किसी जुआरी के अड्डे पर।
वातावरण पवित्र कठिन है।
इंसान और इंसानियत मानव और मानवता जिंदा रहना चाहिए।
आदमी में जहर इतना भर गया है।
विषधरो का वंश सारा डर गया है।
एक दिन तुम सुनोगे राह में।
आदमी के काटने से विषधर कोई मर गया है।
हां एक बात और जो वर्तमान पदेन भाजपाई है राष्ट्रवादी और उनके मन में यही चलता रहता है पार्टी में रहकर आईना दिखाए तो वही व्यक्ति देशद्रोही आतंकवादी गद्दार कहलाने लगा है।न संगठन सुनना पसंद करता है न विधायक।सब प्रधानमंत्री जी तरह मन की बात भाषण सुनाता है।कार्यकर्ता की मन की बात समस्या सुनने की साहस ही नहीं है।किसी भी विधान सभा क्षेत्र में संपर्क का मतलब शादी विवाह श्राद्ध भोज मान लिया गया।संपर्क अभाव जनमानस में क्षोभ उत्पन्न करता है।
जब आपके गली मुहल्ले सड़क बिजली बाढ़ सुखार जल जमाव दुर्गंध सड़न स्वच्छता की बात कोई नहीं सुने तो आप क्या करेंगे?
किसी से राष्ट्रवादी देशभक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए।किसी का क्या बिगाड़ पाएंगे कोई।यह देश जब प्रभु श्री राम के नहीं हुए जानकी जी के नहीं हुए तो हम आप चिंतन ही कर सकते है।शेष बात सोशल मीडिया पर नहीं।
हम उस देश के वासी है जहां सदन और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री की मां को गाली दिया जाता है।और विपक्ष की मां को भी अभद्रता से टिप्पणी किया जाता है।
राजनीतिज्ञों सभी दल के नेता की माता यानी मां तो मां होती है।व्यक्तिगत सभी संबंधों में मां सर्वोपरि है ।जो जननी का सम्मान नहीं कर पाए वह खाक संस्कृति संस्कार सांस्कृतिक विरासत विविधता में एकता और अखंडता संप्रभुता समरसता को समझेगा।
हां आखिरी बात टुकड़े गैंग की खैर नहीं।समाज को तोड़े उसकी खैर नहीं।जातिवाद आतंकवाद पूंजीवाद की खैर नहीं। देशहित सर्वोपरि राष्ट्र हित सर्वोपरि।राष्ट्रवाद एकात्म मानववाद और अंत्योदय वाली भाजपा को नमन करते है।पूंजीवादी सोच का विरोध करते है।
अटल जी के शब्दों में भारत देश मिट्टी का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्र मंदिर है जहां का कंकड़ कंकड़ शंकर है।
सावन के माह में शंकर भगवान महाकाल विश्वनाथ बैद्यनाथ शिव को याद करते हुए परम वैभव शाली संस्कृति संस्कार सांस्कृतिक विरासत विविधता में एकता की प्रतीक भारत माता को विश्व शक्ति विश्व गुरु बनने के संकल्प को दोहराते है।
क्या जीत में क्या हार में।
किंचित नहीं भयभीत मै।
कर्तव्य पथ पर जो मिला।
यह भी सही वह भी सही।।
और आखिरी में यह भी चार पंक्ति के साथ
हम सूरज जैसे सदा चलते है।
चाँद जैसे सदा चमकते है।
ढल जाता है सूरज चंदा टिमटिम तारे।
हम ज्योतिवान है कभी नहीं ढलते है।।
आपका भाई
आग्नेय कुमार
निवर्तमान मीडिया प्रभारी
भाजपा सीतामढ़ी
भारत माता की जय।वंदे मातरम्।जय सियाराम।
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