मधेपुरा। रासबिहारी हाई स्कूल का नाम बदले जाने के कथित निर्णय का श्री कृष्णा यादव महासभा ने कड़ा विरोध किया है। महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता श्याम नंदन कुमार यादव ने बयान जारी कर कहा कि रासबिहारी हाई स्कूल केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि मधेपुरा की ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय का नाम बदलने का प्रयास क्षेत्र की अस्मिता और धरोहर को कमजोर करने की साजिश है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
श्याम नंदन कुमार यादव ने कहा कि रासबिहारी बाबू के योगदान को जाने बिना इस तरह का निर्णय लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मधेपुरा जिले के मुरहो के जमींदार बाबू रास बिहारी लाल मंडल बिहार के सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय आंदोलन के शुरुआती दौर के प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल थे।
उन्होंने कहा कि रास बिहारी लाल मंडल ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक जागरूकता और जनहित के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यादव समाज के संगठन और उत्थान के लिए उन्होंने गोप/यदुवंशी जातीय महासभा के गठन में भी अहम भूमिका निभाई, जिसके माध्यम से सामाजिक सुधार और शिक्षा को बढ़ावा मिला।
महासभा के अनुसार, रास बिहारी लाल मंडल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के शुरुआती समर्थकों में शामिल थे और बिहार में कांग्रेस की प्रारंभिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे। ब्रिटिश शासन की नीतियों का विरोध करने के कारण उनके विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ समय के लिए उनकी जमींदारी भी जब्त कर ली गई थी। बाद में कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें राहत मिली।
बयान में यह भी कहा गया कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी रास बिहारी लाल मंडल के संपर्क में रहे और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया था। साथ ही उनके पुत्र बी.पी. मंडल बिहार के मुख्यमंत्री बने तथा मंडल आयोग के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक न्याय की राजनीति में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
महासभा ने बिहार सरकार से रासबिहारी हाई स्कूल का नाम बदलने के किसी भी प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। संगठन ने कहा कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।