धानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ करीब 25 वर्ष पहले कानपुर के सिनेमाघर में गदर फिल्म देखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता गोपी कृष्णा पांडेय अब राज्यसभा जाएंगे। गोविंद नगर के जूही कालोनी निवासी गोपी कृष्णा पांडेय लंबे समय तक भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्ष 1997 में वह युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे थे।

वर्ष 2000 में गोपी पांडेय को भाजपा किसान मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा के प्रभारी के रूप में भी संगठन का काम संभाला। वह भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। हालांकि वर्तमान में उनके पास संगठन में कोई प्रमुख जिम्मेदारी नहीं थी।

गोपी पांडेय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच पुराना संगठनात्मक जुड़ाव रहा है। वर्ष 2001 में मोदी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थे। तीन जुलाई 2001 को संघ की अखिल भारतीय प्रचारकों की बैठक कानपुर में आयोजित हुई थी। बैठक में शामिल होने के लिए नरेन्द्र मोदी पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से कानपुर पहुंचे थे। उस समय विनोद पांडेय प्रदेश अध्यक्ष थे। कानपुर आने के बाद वह वरिष्ठ कार्यकर्ता गोपी पांडेय के जूही स्थित आवास पर गए थे और करीब तीन दिन वहीं रुके थे।

बताया जाता है कि इसी दौरान नरेन्द्र मोदी ने गोपी पांडेय के घर पर बाल भी कटवाए थे। जूही स्थित आवास के पास ही सिनेमाघर होने की जानकारी मिलने पर मोदी कुछ कार्यकर्ताओं के साथ फिल्म देखने पहुंचे थे। उस समय सनी देओल और अमीषा पटेल अभिनीत गदर फिल्म खूब चर्चा में थी। फिल्म 25 जून 2001 को रिलीज हुई थी और आठ दिन बाद तीन जुलाई को मोदी ने कार्यकर्ताओं के साथ लाल पैलेस टॉकीज में गदर फिल्म देखी थी।

करीब 25 वर्ष बाद यह पुराना प्रसंग एक बार फिर चर्चा में है। गोपी कृष्णा पांडेय के राज्यसभा जाने की खबर के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह है। संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे पांडेय की राजनीतिक यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी यह याद खास महत्व रखती है।

प्रकाश पाल राज्यसभा जाएंगे, कानपुर-बुंदेलखंड की सियासत में बढ़ेगा कद

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सूची में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष और वर्तमान प्रदेश भाजपा ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष प्रकाश पाल का नाम भी शामिल है। प्रकाश पाल को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद क्षेत्र की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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