90 दिनों के सुनियोजित एवं समयबद्ध अभियान के बाद चयनित पंचायतों को किया जाएगा बाल श्रम मुक्त घोषित
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मधुबनी,
17 सितंबर।
बाल श्रम के उन्मूलन तथा बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से मधुबनी जिले में विशेष एवं सुनियोजित अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा के निर्देश पर प्रथम चरण में जिले के सभी 21 प्रखंडों मे प्रत्येक से तीन-तीन पंचायतों का चयन किया गया है। इस प्रकार कुल 63 पंचायतों को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चयनित पंचायतों में निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप 90 दिनों तक अभियान चलाने के उपरांत पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने अभियान को प्रभावी, परिणामोन्मुखी एवं समयबद्ध तरीके से संचालित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया है। अभियान के दौरान चयनित पंचायतों में प्रतिष्ठानों, दुकानों, कार्यस्थलों एवं घरेलू कार्यों में नियोजित बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति, पुनर्वास तथा बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रखंड
चयनित तीन पंचायतें
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1/ रहिका के
लक्ष्मीपुर, हुसैनपुर एवं सौराठ
2/ खजौली के
रसीदपुर, सुखकी एवं चतरा उत्तरी
3/ लदनियां के
पिपराही, महथा एवं बेलाही
4/ राजनगर के
भटसीमर पूर्वी, भटसीमर पश्चिमी एवं सुगौना दक्षिणी
5/ घोघरडीहा के
नौआबाखर, सुदै रतोली एवं चिकना
6/ मधेपुर के
सुन्दरपुर विराजित, बाथ एवं रहुआ संग्राम
7 / झंझारपुर के
सिमरा, चनौरागंज एवं कौड़िया
8 / लखनौर के
कैथिनिया, गंगापुर एवं लखनौर पश्चिमी
9/ अंधराठाढ़ी के
गनौली, शिवा एवं डुमरा
10/ फुलपरास
कालापट्टी, रामनगर एवं रिसवार
11 / हरलाखी
करुणा, विसौल एवं कलना
12/ मधवापुर के
विशनपुर, पहिपारा एवं तरैया
13 / बाबूबरही के
कुलहरिया, धनचौड़ एवं महिषवाड़ा
14 / पंडौल के
मकरमपुर, सागरपुर एवं पंडौल पूर्वी
15/ बासोपट्टी के
हथियापुर परसा, सिरियापुर एवं डामु
16 / कलुआही के
करमौली, मलमल उत्तरी एवं कालिकापुर
17 / बिस्फी के
जफरा, तीसी नरसाम दक्षिण एवं परसौनी उत्तर
18/ खुटौना के
विरपुर, बारूदेवपुर एवं दुर्गीपट्टी
19/ लौकही के
लदनियां, नरेंद्रपुर एवं धरहरा
20/ जयनगर के
बेलही पूर्वी, बेलही दक्षिणी एवं बेलही पश्चिमी
21/ बेनीपट्टी के
परसौना, समदा एवं परौल
बाल श्रम के विरुद्ध नियमित अभियान एवं निरीक्षण
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जिलाधिकारी ने श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्राधीन चयनित पंचायतों में प्रतिष्ठान, दुकान एवं घरेलू कार्य में संलग्न बाल एवं किशोर श्रमिकों को विमुक्त कराने के लिए निर्धारित नियमानुसार अभियान चलाते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत नियोजकों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने तथा श्रम अधीक्षक को अभियान का सतत एवं प्रभावी अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया है।
विमुक्त बच्चों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित
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जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि विमुक्त बाल/किशोर श्रमिकों का निकटतम विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही संबंधित पदाधिकारी नियमित अनुश्रवण करते हुए इसका प्रतिवेदन श्रम अधीक्षक के माध्यम से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि विमुक्त बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
पंचायत स्तर पर टास्क फोर्स सक्रिय रहेगा
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सभी प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को चयनित पंचायतों में गठित पंचायत टास्क फोर्स की नियमित बैठक कराने तथा अभियान की प्रगति की समीक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसी प्रकार प्रखंड विकास पदाधिकारियों को अभियान के संचालन के लिए नियमित रूप से प्रखंड स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक कराते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार कर चयनित पंचायतों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार
बाल एवं किशोर श्रम के विरुद्ध जन-जागरूकता कार्यक्रम, प्रभात फेरी, साइकिल रैली, नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निर्देश दिया गया है। चयनित पंचायतों में बाल श्रम निषेध से संबंधित बैनर, दीवार लेखन तथा स्थानीय भाषा में जागरूकता संदेशों का प्रसार भी सुनिश्चित किया जाएगा।
विमुक्त बच्चों के पुनर्वास पर विशेष जोर~~~~~~
′′जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देश दिया गया है कि श्रम विभाग से विमुक्त बाल/किशोर श्रमिकों की सूची प्रत्येक सप्ताह प्राप्त कर उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। अभियान के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, शिक्षा एवं संरक्षण से संबंधित सरतकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान देने कि निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकार, शिक्षा और उनके समग्र विकास में बाधक है। इसलिए अभियान का उद्देश्य केवल बाल श्रमिकों को कार्यस्थलों से विमुक्त कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा से जोड़ते हुए उनके सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य के लिए आवश्यक संरक्षण एवं पुनर्वास सुनिश्चित करना है। सभी संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ अभियान को निर्धारित 90 दिनों की समय-सीमा में प्रभावी ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया गया है।