माता सीता की जन्मभूमि पुनौराधाम में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा भव्य और दिव्य सीता मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। इस ऐतिहासिक परियोजना को लेकर मिथिला क्षेत्र सहित पूरे बिहार में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। श्रद्धालुओं में आस्था, भक्ति और समर्पण की भावना और मजबूत हुई है।
मंदिर निर्माण के लिए परिसर में मौजूद कई पुराने भवनों को हटाया जा रहा है। लेखक आग्नेय कुमार ने अपने आलेख में पुनौराधाम से जुड़ी पुरानी स्मृतियों और उन भवनों के महत्व को भावनात्मक रूप से याद किया है।
पुराने पर्यटन भवन से जुड़ी यादें
लेखक ने बताया कि मुख्य मार्ग के प्रवेश द्वार के बाईं ओर स्थित पुराना पर्यटन भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। वर्ष 1999 में श्री लक्ष्मी किशोरी महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के सौ स्वयंसेवकों ने इसी भवन में दस दिवसीय विशेष शिविर आयोजित किया था।
उस दौरान कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुरारी शरण, नगर परिषद अध्यक्ष मनोज कुमार, पूर्व विधायक स्वर्गीय भोला बाबू और शिक्षक फकीरा बाबू का मार्गदर्शन मिला था। उस समय पुनौराधाम मंदिर तक जाने वाली सड़क कच्ची थी और स्वयंसेवक श्रमदान के माध्यम से आसपास के क्षेत्र की सफाई और सुधार कार्य करते थे।
गायत्री शक्तिपीठ से जुड़ी आस्था
लेखक ने श्री गायत्री शक्तिपीठ पुनौराधाम से जुड़ी स्मृतियों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि वेद माता गायत्री से जुड़े होने के कारण शिविर के दौरान नियमित पूजा-अर्चना, सत्संग, यज्ञ और युवा कार्यक्रमों में भागीदारी होती थी।
आलेख में कहा गया है कि सार्वजनिक सहयोग से निर्मित यह भवन भी अब सीता मंदिर परियोजना के लिए हटाया जा रहा है।
अन्य पुराने भवन भी परियोजना के दायरे में
लेखक ने पुनौराधाम स्थित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, पुराने सुलभ शौचालय, रीगा चीनी मिल द्वारा निर्मित यात्री निवास और बिहार सरकार पर्यटन विभाग के अतिथि भवन से जुड़ी यादों को साझा किया है।
उन्होंने बताया कि कई संत, विद्वान, साधु-सन्यासी और अधिकारी इन भवनों में ठहरते रहे थे। समय के साथ व्यवस्था बदली और अब मंदिर निर्माण के लिए इन संरचनाओं को हटाया जा रहा है।
सीता प्रेक्षागृह से जुड़ी यादें
आलेख में सीता प्रेक्षागृह को सीतामढ़ी की पहचान और गौरव बताया गया है। लेखक ने लिखा है कि इस सभागार में कई धार्मिक आयोजन, कथा, यज्ञ, सरकारी कार्यक्रम और सामाजिक समारोह आयोजित हुए थे।
जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज की कथा सहित कई महत्वपूर्ण आयोजनों की यादें इस भवन से जुड़ी रही हैं। मंदिर निर्माण के लिए अब यह भवन भी हटाया जा चुका है।
बाल सीता मंदिर निर्माण की स्मृति
लेखक ने सीता कुंड के समीप बन रहे बाल रूप सीता मंदिर के अर्धनिर्मित भवन का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सहयोग से बाल सीता की प्रतिमा स्थापना के उद्देश्य से यह निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन भव्य सीता मंदिर परियोजना के कारण इसे भी हटाया गया।
आलेख के अंत में लेखक ने कामना की है कि पुनौराधाम में बनने वाला भव्य सीता मंदिर विश्वस्तरीय धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र बने तथा माता सीता की भव्य प्रतिमा स्थापित हो।
