बाल विवाह बचाओ आंदोलन (1929 मॉडल) 🙂
जब 1929 में ब्रिटिश सरकार ने
मासूम बच्चियों की जान बचाने की गुस्ताख़ी करते हुए
शारदा बिल ले आई—
तो देश में अचानक
धर्म ख़तरे में आ गया
ब्राह्मण और मुस्लिम कट्टरपंथी एक सुर में बोले—
“ये हमारे धार्मिक रीति-रिवाज में दखल है!”
बिल की भयानक शर्तें देखिए 😂
लड़की की शादी 14 साल से पहले नहीं
लड़के की शादी 18 साल से पहले नहीं
“मतलब…
अब खेलने के लिए
नाबालिग बच्ची इतनी आसानी से नहीं मिलेगी “
कट्टरपंथियों को यही बात चुभ गई।
क्योंकि परंपरा यही थी—
बच्ची पहले दुल्हन बने,
फिर माँ,
फिर मरीज़,
और कई बार…
सीधे भगवान के पास
ब्रिटिश सरकार ने सोचा—
“चलो, बच्चियों की ज़िंदगी बचाई जाए।”
और यहीं से
धर्म-रक्षा मोड ऑन हो गया
विरोधियों की शानदार सूची में थे—
जमीयत उलेमा-ए-हिंद,
मौलवी मोहम्मद याकूब,
मियां मोहम्मद शाहनवाज,
बाल गंगाधर तिलक,
मदन मोहन मालवीय
और न जाने कितने संस्कृति के ठेकेदार
सबका संदेश एक ही था—
“बच्चियों की जान जाए तो जाए,
लेकिन परंपरा ज़िंदा रहनी चाहिए।”
और आज…
उसी इतिहास पर गर्व करके कहा जाता है—
हमारी संस्कृति महान है
