नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड मुख्यालय में राजकीय डिग्री महाविद्यालय स्थापित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। प्रस्तावित चक्का जाम कार्यक्रम से पहले आंदोलन से जुड़े कई लोगों को उनके घरों से हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई है, जिसके बाद क्षेत्र में असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।

आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि अब तक करीब 60 लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान एक विशेष समुदाय के लोगों को अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित किया गया। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि ऐसे आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है।

आंदोलनकारियों ने नगरनौसा स्थित मिडिल स्कूल के शिक्षक सत्यनारायण यादव को हिरासत में लिए जाने पर भी आपत्ति जताई है और इसे अनुचित कार्रवाई बताया है।

दरअसल, नगरनौसा के नागरिक पिछले कई दिनों से यह मांग कर रहे हैं कि प्रस्तावित राजकीय डिग्री महाविद्यालय को प्रखंड मुख्यालय स्थित पूर्व बालिका विद्यालय परिसर में संचालित किया जाए। आंदोलनकारियों के अनुसार, उक्त परिसर में लगभग दो एकड़ भूमि उपलब्ध है और यहां 12 कमरे पहले से निर्मित हैं। चूंकि विद्यालय का संचालन बंद हो चुका है, इसलिए स्थानीय स्तर पर इस परिसर को महाविद्यालय के लिए उपयोग में लाने की मांग की जा रही है।

इसके विपरीत, राज्य सरकार द्वारा प्रखंड मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर उस्मानपुर-लोदीपुर गांव में महाविद्यालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि महाविद्यालय प्रखंड मुख्यालय में स्थापित होता है तो नगरनौसा और आसपास के हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर और आसान पहुंच मिल सकेगी।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी प्रखंड मुख्यालय स्थित पूर्व बालिका विद्यालय परिसर में महाविद्यालय संचालित करने की अनुशंसा की थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

आंदोलनकारियों के अनुसार, नगरनौसा और थरथरी से संबंधित प्रस्ताव एक ही प्रक्रिया के अंतर्गत शामिल थे, लेकिन थरथरी से जुड़े प्रस्ताव पर कार्रवाई हुई जबकि नगरनौसा के मामले में निर्णय लंबित है। इसी वजह से क्षेत्र के लोगों के बीच उपेक्षा और भेदभाव की भावना पैदा होने की बात कही जा रही है।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग से स्थानीय संसाधनों, छात्रों की जरूरतों और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की भी अपील की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिक्षा, छात्रहित और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर दीर्घकालिक और न्यायसंगत निर्णय लिया जाना चाहिए।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version