ब्राह्मण वेदों पर फोकस करें जो वैज्ञानिक ग्रन्थ हैं। वेदों का ज्ञान घर घर पहुंचाएं। नफ़रत से बचें। ब्राह्मण को रिजर्वेशन / आरक्षण आदि का विरोध नहीं करना चाहिए!नफ़रती सोच या व्यबहार ब्राह्मणों के व्यक्तित्व को नष्ट कर रहा है। बहुत सारे नई ब्राह्मण पीढ़ी भटक गई है नफ़रत में। ब्राह्मण ही वास्तविक अभिभावक है और अभिभावक यदि स्वार्थ पूर्ति में रत्त हो जाएगी या अपने स्वार्थ या आर्थिक चिंता में क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र से इर्षया या पर्तिसपर्धा करेंगे तो समाज – राष्ट्र में अराजकता आएगी! वह किसी के लिए मंगलकारी नहीं होगी!
आप सामाजिक सद्भाव, एकता, ज्ञान, नैतिकता, आध्यात्म, कौशल विकास पर कार्य करो बांकी समाज आपको सर आँखों पर बिठाएगी!! सत्युग, त्रेयता,द्वापर में यही आपकी पूंजी थी फिर इस कलियुग के पहले चरण में ही ब्राह्मण पद्चयुत क्यों हो रहे हैं! आप में से कुछ दारु, शराब, अफीम, कालाबाजारी, अनैतिकता, अन्याय, भ्रष्टाचार, कदाचार, व्यभिचार, समाज व राष्ट्र विरोधी कृत्यों में रत्त हो रहे हैं यह सनातन समाज के सह-आस्तित्व और समग्र विकास के लिए ठीक नहीं! कहाँ ब्राह्मणों का भाव था –
” सर्वे भवन्तुः सुखिन: सर्वे संतु निरामया!
सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चिद दुख भाव भवेत्!!”

अब निजी व निज कुल का स्वार्थ चरम पर है! फिर आदर कहाँ मिलेगा? सम्मान कहाँ मिलेगा? लोग निश्पक्ष अभिभावक कैसे मानेंगे? जबरदस्ती इज्जत किसी को नहीं मिलती! फिर ब्राह्मण जो त्याग की प्रतिमूर्ति है, वह स्वारथ में डुबेगा तो बेडा गर्त होगा भारत, भारती व भारतीयता का! आपका इतना गद गिर गया है कि आप चौक चौराहे पर धरना प्रदर्शन करते हो आरक्षण विरोध में!

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