सीतामढ़ी। मिथिला की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के उद्देश्य से देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जानकी जन्मभूमि पुनौरा धाम और पंथ पाकर धाम का दर्शन किया। इस दौरान कवियों ने धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को जाना तथा काव्य पाठ के माध्यम से माता सीता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

डॉ. भावना के नेतृत्व में 16 कवियों का दल सीतामढ़ी पहुंचा। यहां सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा के निदेशक आग्नेय कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें ‘पंच तीर्थ दर्शन’ पुस्तिका भेंट की। वहीं संरक्षक विमल कुमार परिमल ने जानकी जन्मभूमि और मिथिला के पंच तीर्थों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने पंथ पाकर धाम की विशेषता बताते हुए कहा कि यह स्थल भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार इसी स्थान पर भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम का ऐतिहासिक मिलन हुआ था। यहीं पर परशुराम का क्रोध शांत हुआ और दोनों दिव्य व्यक्तित्वों के मार्ग अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़े। इस ऐतिहासिक प्रसंग का साक्षी पंथ पाकर धाम का प्राचीन विशाल पाकर वृक्ष माना जाता है।

पंथ पाकर धाम के महंत राम रेखा दास ने उपस्थित कवियों को शिव कृपा से जुड़े पाकर वृक्ष की धार्मिक महत्ता बताते हुए इसे शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक बताया। कवियों ने नागपुष्प के दर्शन किए तथा सीता कुंड के पवित्र जल से आचमन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।

कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। अनिल कुमार झा ने अपनी पुस्तक ‘हे राम’ से तुलसी पदावली और मिथिला की प्रसिद्ध सनेश भार यात्रा पर आधारित काव्य प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

बेंगलुरु से आईं कवयित्री इंजीनियर गरिमा सक्सेना ने “जनकपुर आए हैं रघुवर” शीर्षक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं डॉ. भावना ने अन्य कवयित्रियों के साथ सामूहिक स्वर में माता जानकी पर आधारित गीत प्रस्तुत किया, जिसमें नारी चेतना, संघर्ष, सम्मान और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।

इस आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा में विज्ञान व्रत (नोएडा), अनिरुद्ध सिन्हा (मुंगेर), दिनेश प्रभात (भोपाल), हरि नारायण सिंह ‘हरि’ (समस्तीपुर), अनिल कुमार झा (देवघर), गरिमा सक्सेना (बेंगलुरु), कविता विकास (नोएडा), डॉ. अमर पंकज (गाजियाबाद), राहुल शिवाय (दिल्ली), रामनाथ ‘बेखबर’ (कोलकाता), डॉ. संजय पंकज (मुजफ्फरपुर), डॉ. भावना (मुजफ्फरपुर), नीता सक्सेना (भोपाल), रश्मि सक्सेना (भोपाल) सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में पंथ पाकर निवासी उपेन्द्र सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा से परिचित कराया। इस अवसर पर आध्यात्मिक आस्था, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला।

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