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संवाददाता मनोज जायसवाल
सिंगरौली -“ड्यूटी कम, दबंगई ज़्यादा” बीट गार्ड पुष्पराज पाण्डेय की कार्यशैली पर उठे सवाल!
माड़ा वन परिक्षेत्र में इन दिनों जंगल से ज्यादा “जंगलराज” की चर्चा है। वजह हैं बीट गार्ड पुष्पराज पाण्डेय , जिनकी कार्यशैली अब ड्यूटी से ज्यादा “दबंग अंदाज़” के लिए जानें जा रहे है।
ताजा मामला तब सामने आया जब महिला वन परिक्षेत्र अधिकारी पुष्पा सिंह को ही उनके अधीनस्थ कर्मचारी पुष्पराज पाण्डेय ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दे डाली। बताया जा रहा है कि जिन साहब को जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, वे खुद ही नियमों को “वन्यजीव” समझकर आज़ाद घूम रहे हैं – कभी ड्यूटी से नदारद, तो कभी मीटिंग में हंगामा।
सूत्रों के अनुसार, सीजफायर ड्यूटी से लगातार गायब रहने वाले बीट गार्ड को जब मीटिंग में जवाब देना पड़ा, तो साहब का “संयम” भी छुट्टी पर चला गया। भरी बैठक में भाषा ऐसी रही मानो अधिकारी नहीं, कोई निजी दुश्मनी निभाई जा रही हो।
अब हालात ये हैं कि शिकायत दर्ज होते ही आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है – यानी ड्यूटी के समय गायब रहने की पुरानी आदत अब “फरारी” में भी काम आ रही है।
जूता उतारकर मारने वाली खबरें भ्रामक वन मंडल अधिकारी ने की पुष्टि
वन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि “जूता मारने” जैसी खबरें भ्रामक हैं, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि अपशब्दों का प्रयोग हुआ है। वैसे, ये पहला मौका नहीं है जब बीट गार्ड की “बहादुरी” सामने आई हो। पहले भी वरिष्ठ अधिकारी के साथ अभद्रता और बेल्ट चलाने जैसे कारनामे कर चुके हैं, जिस पर विभागीय कार्रवाई भी हो चुकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन पर जंगल और कानून की रक्षा की जिम्मेदारी है, अगर वही नियमों को ठेंगा दिखाएं, तो फिर आम जनता क्या सीखे?
तीन संतान होने के बावजूद नौकरी जारी रखना
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकार की आंखों में धूल झोंकना कहां तक उचित आरोपी पुष्पराज पांडे नौकरी के दौरान भी तीन संतान पैदा कर कर रहा नौकरी मानो नियमों को “सलाह” समझ लिया गया हो, पालन करने की चीज़ नहीं।*
माड़ा वन परिक्षेत्र में पेड़ों से ज्यादा तेवर हरे-भरे नजर आ रहे हैं। अब देखना यह है कि विभाग और पुलिस इस “दबंग बीट गार्ड” की कहानी का अंत कानून के हिसाब से लिखते हैं या फिर यह मामला भी जंगल की तरह घना होकर रह जाएगा।
