भारतीय जनता पार्टी के नेता के. अन्नामलाई ने मंगलवार को केंद्र सरकार से अपील की कि वह मौजूदा एकेडमिक ईयर में तीन-भाषा नीति लागू करने के अपने फैसले को वापस ले लें।

अन्नामलाई ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से भी कहा कि वह इस नीति को तीन साल बाद लागू करे, जैसा कि शुरू में इस बारे में घोषणा की गई थी। अन्नामलाई ने कहा कि इस फैसले से छात्रों के अभिभावकों को गहरा झटका लगा है।

3-भाषा रूल पर CBSE के विरोध में अन्नामलाई

अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘अप्रैल 2026 में, जब CBSE बोर्ड ने घोषणा की थी कि कक्षा 6 से आगे के छात्रों के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य होंगी और उन तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए, तो मैं उन लोगों में से था जिन्होंने इस फैसले का स्वागत किया था, क्योंकि इससे बच्चों को कम उम्र से ही भारत की विविध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद मिलेगी।’

अन्नामलाई ने आगे लिखा, ‘अप्रैल 2026 में जारी अधिसूचना में, यह साफ तौर पर कहा गया था कि कक्षा 9 के CBSE छात्रों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने का नियम तीन साल बाद, यानी 2029-30 के एकेडमिक साल से ही लागू किया जाएगा।’

अन्नामलाई ने CBSE के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए आगे लिखा, ‘हालांकि, 15 मई 2026 को CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों को भेजे गए नए सर्कुलर में कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा को इसी मौजूदा एकेडमिक साल से ही अनिवार्य कर दिया है।’

बीजेपी नेता ने बताया, ‘CBSE बोर्ड ने अपनी पिछली घोषणा के खिलाफ काम किया है, जिसमें कहा गया था कि यह नियम केवल 2029-30 के एकेडमिक साल से लागू होगा। CBSE की इस अचानक घोषणा से अभिभावकों को, खासकर तमिलनाडु के छात्रों के अभिभावकों को, गहरा झटका लगा है।’

अन्नामलाई ने बच्चों और अभिभावकों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए कहा, ‘ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके बच्चों ने कक्षा 6 में ही अपनी पसंद की भाषा चुन ली थी, लेकिन नई जारी अधिसूचना के अनुसार, कक्षा 9 के छात्रों को अब अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए और यह नियम 1 जुलाई 2026 से ही लागू हो जाएगा।’

अन्नामलाई ने आगे कहा, ‘छात्रों से इतने कम समय में एक नई भाषा सीखने की उम्मीद करना बच्चों के लिए अनावश्यक मानसिक तनाव पैदा करेगा और उनके समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर डालेगा।’

अन्नामलाई की केंद्र सरकार से अपील

अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए लिखा, ‘मैं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध करता हूं कि वह इस नई अधिसूचना को तुरंत वापस ले और कक्षा 9 में तीन भाषाओं (जिनमें दो भारतीय भाषाएँ शामिल हों) को अनिवार्य बनाने की योजना को तीन साल बाद, यानी 2029-30 के एकेडमिक साल से ही लागू करे, जैसा कि शुरू में घोषणा की गई थी।’

क्या है CBSE का 3-भाषा रूल?

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के हालिया निर्देश के मुताबिक, सेकेंडरी स्तर पर तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। सीबीएसई के इस फैसले ने अभिभावकों, छात्रों और स्कूल प्रशासकों के बीच चिंता पैदा कर दी है।

यह चिंता विशेष रूप से इस बात को लेकर है कि इस नियम को सत्र के बीच में लागू किया जा रहा है और इसका उन छात्रों पर क्या असर पड़ेगा जो अपनी दूसरी भाषा के तौर पर किसी विदेशी भाषा का अध्ययन कर रहे हैं।

संशोधित नीति के अनुसार, छात्रों को सेकेंडरी स्तर पर तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इन भारतीय भाषाओं के विकल्पों में हिंदी और संस्कृत शामिल हैं।

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