सीतामढ़ी, बिहार: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर जन सुराज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को डूमरा के अंबेडकर स्मारक स्थल पर एक दिन का उपवास अनशन और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के नेताओं ने बिहार सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और परीक्षा में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच के साथ-साथ पुनर्परीक्षा कराए जाने की मांग की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए और एकजुट होकर सरकार के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन का उद्देश्य और मुद्दे:
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार की ओर से BPSC परीक्षा में हुई अनियमितताएँ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर को गिरफ्तार किया और छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करवाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतंत्र का हनन बताते हुए कहा कि सरकार जनता और छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
नवल किशोर राऊत की बयानबाजी:
प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए जन सुराज के जिला अध्यक्ष नवल किशोर राऊत ने कहा कि प्रदेश की नीतीश सरकार लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज और प्रशांत किशोर की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है। राऊत ने बिहार के युवाओं के लिए नीतीश सरकार से पांच प्रमुख मांगें की, जिनमें से प्रमुख थीं:
- 70वीं BPSC परीक्षा में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की जाए और पुनर्परीक्षा कराई जाए।
- 2015 में सात निश्चय के तहत किए गए वादे के अनुसार 18 से 35 साल के हर बेरोजगार युवा को बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।
- पिछले 10 वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
- लोकतंत्र की जननी बिहार को लाठीतंत्र बनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
- बिहार की सरकारी नौकरियों में बिहार के युवाओं की कम से कम दो तिहाई हिस्सेदारी सुनिक्षित करने के लिए डोमिसाइल नीति लागू की जाए।
प्रशांत किशोर के अनशन पर सरकार से सम्मानजनक समझौते की मांग:
राऊत ने आगे कहा कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जी वर्तमान में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रशांत किशोर के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनसे सम्मानजनक समझौता कर अनशन समाप्त कराए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपनी दमनकारी नीतियों को छोड़कर लोकतांत्रिक तरीके से काम करना चाहिए और युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रमुख नेता:
इस प्रदर्शन में जन सुराज पार्टी के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें सीतामढ़ी के जिला अध्यक्ष नवल किशोर राऊत, राज्य कार्यवाहक अभियान समिति के सदस्य शंकर आत्रे, राज्य कार्यवाहक समिति सदस्य राम कृपाल शर्मा, मायाशंकर शरण, बिजेंद्र यादव, नरेंद्र झा, जिला मुख्य प्रवक्ता विरेन्द्र कुमार यादव, जिला अभियान समिति संयोजक तनवीर अली उर्फ पपलु खान, जिला कार्यालय प्रभारी सरफराज अंजुम, युवा जिला अध्यक्ष रिजाउल्ला उर्फ लड्डन, सीतामढ़ी सदर एवं बेलसंड अनुमंडल अध्यक्ष महान सिंह कुशवाहा, नगर निगम महिला अध्यक्ष सावित्री प्रसाद, नगर निगम प्रवक्ता ममता कुमारी, नानपुर प्रखंड अध्यक्ष अमित कुमार, बाजपट्टी प्रखंड अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह, सुरसंड प्रखंड अध्यक्ष मनोज मिश्रा, रून्नीसैदपुर प्रखंड अध्यक्ष अशोक सिंह, परिहार प्रखंड अध्यक्ष अमानुल्लाह उर्फ निराले, बेलसंड प्रखंड अध्यक्ष राजन मिश्रा, युथ क्लब संयोजक रिगा प्रखंड जीवछ यादव, रमेश चौधरी समेत कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
जन सुराज का आंदोलन और उसकी प्रेरणा:
जन सुराज पार्टी के इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य बिहार के छात्रों और उनके भविष्य की रक्षा करना है। पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा की अनियमितताओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बिहार के छात्रों की भविष्यवाणी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग है। जन सुराज के नेताओं ने जनता से अपील की कि वे इस संघर्ष में साथ आएं और सरकार की दमनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करें।
बिहार के युवाओं के लिए जन सुराज की मांगें:
जन सुराज पार्टी ने बिहार के युवाओं के लिए अपनी प्रमुख मांगों को भी स्पष्ट किया। पार्टी ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बिहार की सरकारी नौकरियों में बिहार के युवाओं की कम से कम दो तिहाई हिस्सेदारी हो। इसके साथ ही, जन सुराज ने यह भी मांग की है कि बिहार में बेरोजगारी भत्ते का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच हो।
नतीजा और भविष्य की दिशा:
इस आंदोलन के बाद जन सुराज पार्टी के नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि वे सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए सभी वैध और लोकतांत्रिक तरीके अपनाएंगे। पार्टी ने यह भी कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है, तो वे और भी बड़े आंदोलन की योजना बना सकते हैं। जन सुराज के नेता यह मानते हैं कि यह आंदोलन केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह बिहार के युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए है।
निष्कर्ष:
जन सुराज पार्टी का यह आंदोलन बिहार के छात्रों और युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है। यह आंदोलन न केवल बीपीएससी परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ है, बल्कि यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा कदम है। जन सुराज पार्टी का यह संघर्ष इस बात को साबित करता है कि बिहार के युवा अब अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं और वे किसी भी स्थिति में अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।
आगे क्या होगा?
यह देखना अब दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इस आंदोलन और प्रदर्शन के बाद अपनी नीतियों में क्या बदलाव करती है। क्या सरकार जन सुराज की मांगों को स्वीकार करेगी या यह आंदोलन और भी तेज होगा? इसके परिणाम बिहार के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि यह केवल एक परीक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य के युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य से जुड़ा हुआ है।