दिल्ली में आयोजित 5 दिवसीय AI Impact Summit के दौरान देश-दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश की प्रतिबद्धता जता रहे हैं। तकनीकी निवेश और भविष्य की संभावनाओं को लेकर मंच से बड़े ऐलान किए जा रहे हैं।

इसी बीच मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट साझा करते हुए देश में एआई के भविष्य को मजबूत बनाने पर अपने विचार रखे। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने समिट की चर्चाओं को व्यापक संदर्भ में देखने की बात कही।

उन्होंने लिखा कि एआई समिट में कौन बोला और क्या कहा, इससे आगे बढ़कर यह देखना होगा कि देश वास्तव में एआई युग के लिए कितनी तैयारी कर रहा है। उनके अनुसार, मंच पर आकर्षक प्रस्तुतियां और भविष्य की चमकदार तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है।

“असली सवाल तैयारी का है”

मनीष सिसोदिया ने कहा कि देश के अधिकांश स्कूलों में अब भी ‘कंप्यूटर क्लास’ के नाम पर बच्चों को सीमित कौशल, जैसे टाइपिंग, ही सिखाई जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भारत को एआई क्षेत्र में अग्रणी बनना है, तो स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक तकनीकी ढांचे और पाठ्यक्रम में व्यापक सुधार की आवश्यकता होगी।

एआई समिट के दौरान जहां निवेश और नवाचार पर चर्चा हो रही है, वहीं सिसोदिया के इस बयान ने शिक्षा प्रणाली और तकनीकी तैयारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि नीति-निर्माता इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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