पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि वो कम्प्रोमाइज्ड हैं। उन्होंने इस ओर इशारा किया कि वह पार्टी के व्हिप के विरुद्ध जा रहे हैं।
मान ने कहा कि अगर चड्ढा पश्चिम बंगाल में वोटों के हटाए जाने जैसे मुद्दों पर बोलने, महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद से वॉकआउट करने, या गुजरात में कई आप कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने को तैयार नहीं हैं, तो यह पार्टी की लाइन को तोड़ना और पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाना है।
दरअसल, चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगवंत मान आप सांसद राघव चड्ढा को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। गौरतलब है कि चड्ढा ने राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद कहा था कि उन्हें खामोश किया गया है, हराया नहीं गया है।
क्या बोली आम आदमी पार्टी?
चड्ढा पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को उन पर संसद में केंद्र के खिलाफ मुद्दे उठाने से कतराने और इसके बजाय सॉफ्ट पब्लिस रिलेशन में लगे रहने का आरोप लगाया।
राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरता है, देश के लिए लड़ सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि चड्ढा “समझौता कर चुके हैं,” तो मान ने जवाब दिया- हां। मान ने कहा कि पार्टियों के लिए संसद में अपने नेता बदलना कोई असामान्य बात नहीं है।
सीएम मान ने दिया उदाहरण
राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से चड्ढा को हटाए जाने को लेकर मान ने कहा कि जब मैंने पहली बार चुनाव जीता था (2014 में संगरूर लोकसभा से), तो डॉ. (धर्मवीर) गांधी (उस समय के AAP सांसद, जो अब कांग्रेस में हैं) को पार्टी के संसदीय बोर्ड का नेता बनाया गया था।
बाद में मैंने भी इस पद पर काम किया। इसलिए, पार्टी ऐसे फैसले लेती रहती है। एक और सवाल के जवाब में मान ने कहा कि जब हम लोकसभा या राज्यसभा में विपक्ष के सदस्य के तौर पर बैठते हैं, तो कई फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, जैसे कि वॉकआउट करना। लेकिन अगर कोई पार्टी की लाइन तोड़ता है या बात नहीं मानता, तो यह व्हिप के खिलाफ होता है।
