मुंगेर यूनिवर्सिटी रोज व रोज भ्रष्टाचार का कीर्तिमान स्थापित करने में लगा है इसके सूत्रधार कोई और नहीं खुद कुलपति संजय कुमार हैं बिना लक्ष्मी के कुछ भी नहीं होता तबादला पदस्थापना जो भी यूनिवर्सिटी के अंतर्गत जिन कॉलेजों में विकास कार्य हो रहे या आपूर्ति से लेकर अन्य कार्य सबके सब इनके द्वारा संरक्षित लोग ही कर रहे है बीडी कॉलेज में प्राचार्य रहते हुए कम गुल नहीं खिलाए है कीटनाशक खरीद के नाम पर 15 लाख के घोटाले और एसबीसिंहा मामले में करोड़ों के खेल किए जाने की चर्चा लोग चटखारे लेकर करते है मुंगेर यूनिवर्सिटी में कुलपति बनने के लिए योग्यता की जगह राजभवन में जो चढ़ावा चढ़ाया वही इनकी पात्रता है लखीसराय में अपनी जमीन नहीं होने के बावजूद कांग्रेस सेवा दल की जमीन पर एसएस कॉलेज का बिल्डिंग करोड़ों रु खर्च करके बनाया गया ताकि कुलपति महोदय को खूब मोतीबकमाई हो सके ताजातरीन मामला है द्वारिका कॉलेज के प्रिंसिपल रहे प्रो डॉ जगन्नाथ गुप्ता का जिन्हें मुंगेर यूनिवर्सिटी के कॉलेज में योगदान देने का जो अपना योगदान देने के लिए झूल रहे है पिछले जनवरी माह से आरोप है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति संजय कुमार ने इसके लिए 25 लाख रु बाजाप्ता पटना स्थित आवास पर बुलाकर डॉ गुप्ता से मांगा जिसे देने में डॉ गुप्ता ने असमर्थता जताई जिसके फलस्वरूप डॉ गुप्ता का योगदान का मामला लटकाया गया बाद में यूनिवर्सिटी में प्रिंसीपल नियुक्ति के लिए काउंसलिंग हुई जिसमें गैर संवैधानिक तरीके से 17 सर्टिफिकेट मांगे गए वावजूद जगन्नाथ गुप्ता ने सबकुछ संतोषप्रद तरीके से उपलब्ध कराया काउंसलिंग में मौजूद तमाम अधिकारी डॉ गुप्ता से संतुष्ट भी हुए फिर भी उन्हें कॉलेज प्रिंसिपल के तौर पर योगदान कराने की जगह टाल मटोल किया जा रहा जब मैने कुलपति संजय कुमार से बात किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया कहा कि उनसे और कागजात मांगे गए है जबकि जगन्नाथ गुप्ता ने किसी तरह के कागजात मांगे जाने से अनभिज्ञता जाहिर की सवाल उठता है कि शिक्षा के मंदिर का पुजारी इतना मदमस्त है कि अवैध कमाई और भ्रष्टाचार के लिए जगन्नाथ गुप्ता को प्रिंसिपल तबतक नहीं बनाएगा जबतक कि 25 लाख रु चढ़ावा नहीं दे देता इतना बेखौफ हो गए कुलपति खुलेआम विश्वविद्यालय को वैश्य मंडी बनाकर करोड़ों रु खुलेआम कमा रहे और सरकार शासन प्रशासन धृतराष्ट्र बन अब कुछ देखने के लिए लाचार बेबस है
