महंत बड़ाइक दास जी की 165वीं जयंती पर मूर्ति अनावरण और विद्यालय का 60वां स्थापना दिवस: एक ऐतिहासिक आयोजन!

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बिहार के भोजपुर जिले के जादोपुर बिहिया स्थित महंत बड़ाइक दास नथुनी सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर महंत बड़ाइक दास जी की 165वीं जयंती के उपलक्ष्य में उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया और विद्यालय के 60वें स्थापना दिवस को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें स्थानीय नागरिक, छात्र-छात्राएं, विद्यालय परिवार और कई सम्मानित अतिथि शामिल हुए।


कार्यक्रम की मुख्य झलकियां:

कार्यक्रम की शुरुआत महंत बड़ाइक दास जी की मूर्ति के अनावरण से हुई। इसके बाद विद्यालय की स्थापना के 60 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने विद्यालय की ऐतिहासिक और शैक्षिक उपलब्धियों को साझा किया। इस दौरान विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सकलदेव सिंह यादव के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई दी गई।

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति:

इस कार्यक्रम में भोजपुर के सांसद श्री सुदामा प्रसाद, मनेर विधान सभा क्षेत्र के विधायक भाई वीरेंद्र, विधायक राहुल तिवारी, विधायक अजीत सिंह, राष्ट्रीय महासचिव ऑल इंडिया यादव महासभा श्री श्याम नंदन कुमार यादव और प्रदेश कोषाध्यक्ष राजकुमार यादव उर्फ गुड्डू यादव सहित कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने महंत बड़ाइक दास जी के जीवन और उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।


महंत बड़ाइक दास जी का जीवन और योगदान:

महंत बड़ाइक दास जी ने अपने जीवनकाल में शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी दूरदर्शिता और समाज सेवा की भावना ने न केवल इस क्षेत्र में शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दी। वक्ताओं ने उनके आदर्शों और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महंत जी का जीवन प्रेरणादायक है और हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए।


विद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा:

महंत बड़ाइक दास नथुनी सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना 60 वर्ष पूर्व हुई थी। तब से लेकर आज तक यह विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल बना हुआ है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने न केवल अकादमिक बल्कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अपनी पहचान बनाई है। वक्ताओं ने विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और उसकी उपलब्धियों की सराहना की।


शैक्षिक गुणवत्ता और भविष्य की योजनाएं:

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और छात्रों के विकास पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी साधन है। विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में शैक्षिक गुणवत्ता को और अधिक उन्नत करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्रों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में देशभक्ति गीत, नृत्य और नाटक शामिल थे, जो सभी को मंत्रमुग्ध कर गए।


नागरिकों की भागीदारी:

इस आयोजन में हजारों स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया और इसे सफल बनाने में अपना योगदान दिया। उनकी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि यह विद्यालय केवल एक शैक्षिक संस्थान नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न हिस्सा है।


समापन:

कार्यक्रम का समापन महंत बड़ाइक दास जी के जीवन पर आधारित विचार-विमर्श और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। सभी अतिथियों और नागरिकों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे एक यादगार दिन बताया।


निष्कर्ष:

महंत बड़ाइक दास जी की 165वीं जयंती और विद्यालय के 60वें स्थापना दिवस का यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक पल था, बल्कि यह समाज को शिक्षा और संस्कृति के महत्व का संदेश भी देता है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को एकजुट करने और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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